आगरालीक्स…। श्रावण के दूसरे सोमवार को सर्वार्थ सिद्धि एवं व्रज योग बन रहे हैं। शिव से पाएं अच्छा स्वास्थ्य और बल। जानिये पूजन विधि।
शिव के गंगाजल व पंचामृत से अभिषेक से मिलती है शीतलता

श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान के ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा बताते हैं कि श्रावण में भगवान आशुतोष का गंगाजल व पंचामृत से अभिषेक करने से शीतलता मिलती है।
हरियाली से पूजा करने पर विशेष पुण्य
भगवान शिव की हरियाली से पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है। खासतौर से श्रावण मास के सोमवार को शिव का पूजन बेलपत्र, भांग, धतूरे, दूर्वाकुर आक्खे के पुष्प और लाल कनेर के पुष्पों से पूजन करने का प्रावधान है।
पंचामृत से पूजा होती है कल्याणकारी
इसके अलावा पांच तरह के जो अमृत बताए गए हैं उनमें दूध, दही, शहद, घी, शर्करा को मिलाकर बनाए गए पंचामृत से भगवान आशुतोष की पूजा कल्याणकारी होती है
बेलपत्र एक दिन पहले ही तोड़कर रखे जाएं
भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने के लिए एक दिन पूर्व सायंकाल से पहले तोड़कर रखना चाहिए। सोमवार को बेलपत्र तोड़कर भगवान पर चढ़ाना उचित नहीं है।
शिव से पहले नंदी की पूजा करना जरूरी
भगवान आशुतोष के साथ शिव परिवार, नंदी भगवान परशुराम की पूजा भी श्रावण मास में लाभकारी है। शिव की पूजा से पहले नंदी की पूजा की जानी चाहिए।
सावन का दूसरा सोमवार- शिव से पाएं स्वास्थ्य और बल
सावन का दूसरा सोमवार भी सर्वार्थ सिद्धि योग लेकर आ रहा है। इसके साथ ही इस दिन व्रज नामक योग भी बन रहा है। इस दोनों योगों के कारण सावन का दूसरा सोमवार विशेष फलदायक बन गया है। इस दिन भगवान शिव की पूजा से बल एवं स्वास्थ्य की प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त करें।
इस सोमवार यह करें
इस सोमवार के दिन भगवान शिव को भांग, धतूरा एवं शहद अर्पित करना उत्तम फलदायी रहेगा