आगरालीक्स…. वेदमाता गायत्री का जन्मोत्सव 12 अगस्त को है। माता गायत्री की पूजा और मंत्र जाप से साधक को किसी चीज की कमी नहीं रहती।
भारतीय संस्कृति की जननी है मां गायत्री

श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भण्डार वाले ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा के अनुसार हिंदू धर्म शास्त्र के अनुसार श्रावण माह में पूर्णिमा के दिन गायत्री जयंती मनाई जाती है। मां गायत्री को भारतीय संस्कृति की जननी और सम्पूर्ण वेदों की माता कहा जाता है।
धार्मिक मान्यताएं
🔶 धर्म ग्रंथों में वर्णित है कि मां गायत्री की उपासना करने वाले साधक की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है एवम साधक को कभी किसी वस्तु की कमी नही होती है। गायत्री मन्त्र के जाप से प्राण, प्रजा, कीर्ति, धन, पशु, आदि का प्रतिफल प्राप्त होता है।
🔷 जो मनुष्य माँ गायत्री की विधि पूर्वक पूजा करता है उसके चारो ओर रक्षा कवच का निर्माण मां गायत्री स्वयं करती हैं, जिससे विपत्ति के समय रक्षा होती है। योग पद्धति में मां गायत्री मंत्र का उच्चारण किया जाता है।
🔶 गीता में भगवान कृष्ण जी ने योगरूढ़ पद्धति में इस बात का उल्लेख किया है कि मनुष्य को गायत्री तथा ॐ मन्त्र का उच्चारण करना चाहिए। वेदों एवं पुराणों के अनुसार मां गायत्री पंचमुखी है। तात्पर्य है, यह समस्त लोक जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी तथा आकाश के पांच तत्वों से बना है।
⭐समस्त जीव के भीतर मां गायत्री प्राण रूप में विद्यमान है। जिस कारण मां गायत्री सभी शक्तियों का आधार रूप मानी गई है। भारतीय संस्कृति का पालन करने वाले को प्रतिदिन मां गायत्री उपासना का जाप करना चाहिए।
गायत्री महामंत्र और उसका अर्थ
🌷ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्
(हे ईश्वर मेरे प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुख स्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देव स्वरूप, परमात्मा हम आपको अंतरात्मा में धारण करते है। आप हमारी बल, बुद्धि, विद्या को सन्मार्ग पर प्रेरित करें।)
गायत्री मन्त्र जाप का महत्व
💥 सर्वप्रथम इस मंत्र और मां गायत्री देवी का वर्णन विश्वामित्र ने किया था। विश्वामित्र ने ऋग्देव में इस मन्त्र को लिखा है। यह मन्त्र मां गायत्री को समर्पित है जो वेदो की माता है।
⭐इस मन्त्र से आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है। धार्मिक ग्रंथों में इसे आध्यात्मिक चेतना का स्रोत भी माना गया है। मां गायत्री की महिमा चारों वेद में निहित है। ऐसी मान्यता है कि जो फल ऋग्वेद, यजुर्वेद तथा सामवेद के अध्ययन से प्राप्त होता है। गायत्री मन्त्र के जाप से एक समान फल प्राप्त होता है।
♦गायत्री जन्मोत्सव पूजन विधि
🌟 ब्रह्ममुहूर्त में स्नान आदि से निवृत्त होकर गायत्री मंदिर या घर के किसी भी शुद्ध पवित्र स्थान पर पीले कुशा के आसन पर सुखासन में बैठकर मां गायत्री की प्रतिमा अथवा चित्र को स्थापित कर उनकी विधि-विधान पूर्वक पूजा करना चाहिए। मां गायत्री पंचमुखी है जो मनुष्य के अंतरात्मा में निहित है।
♦ मां गायत्री का आवाहन
🌷 अगर घर में पूजा कर हैं तो महाप्रज्ञा-ऋतम्भरा गायत्री का प्रतीक चित्र सुसज्जित पूजा वेदी पर स्थापित करें, वेदी पर कलश, घी का दीपक भी स्थापित करें । अब निम्न मंत्र के माध्यम से माता का आवाहन करें।
🍁 ॐ आयातु वरदे देवि त्र्यक्षरे ब्रह्मवादिनि।
गायत्रिच्छन्दसां मातः! ब्रह्मयोने नमोऽस्तु ते॥
ॐ श्री गायत्र्यै नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि, ततो नमस्कारं करोमि।
🌸गु रु. गायत्री मंत्र को गुरू मंत्र भी कहा जाता है इसलिए बिना गुरू के साधना का फल देरी से मिलने संभावना रहती हैं इसलिए साधक के जो भी गुरू हो उनकी चेतना का आवाहन उपासना की सफलता पूजा स्थल पर निम्न मंत्र से करें।
🌺 ॐ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः, गुरुरेव महेश्वरः।
गुरुरेव परब्रह्म, तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
अखण्डमंडलाकारं, व्याप्तं येन चराचरम्।
तत्पदं दर्शितं येन, तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
ॐ श्रीगुरवे नमः, आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि।
🔶 आवाहन के पश्चात् देवपूजन में घनिष्ठता स्थापित करने हेतु पंचोपचार द्वारा पूजन विधिवत् संपन्न करें- जल, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप तथा नैवेद्य आदि पांच पदार्थ प्रतीक के रूप में माँ के समक्ष अर्पित करें ।
शांत चित्त बैठकर जप करें
जप – जप प्रक्रिया कषाय-कल्मषों-कुसंस्कारों को धोने की भावने के साथ भौतिक सुख सुविधाओं की कामना के लिए की जाती है । गायत्री मंत्र का जप न्यूनतम तीन माला अर्थात् घड़ी से प्रायः 24 मिनट या 11 माला अवश्य करें । जप करते वक्त होठ हिलते रहें, किन्तु आवाज इतनी मंद हो कि पास बैठे व्यक्ति भी सुन न सकें ।
🔶 सूर्यार्घ्यदान – विसर्जन – जप समाप्ति के बाद पूजा वेदी पर रखे छोटे कलश का जल सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के भाव से पूर्व दिशा में सूर्य भगवान को र्अघ्य रूप में निम्न मंत्र के उच्चारण के साथ चढ़ायें ।
🔷 एहि सूर्य सहस्रांशो, तेजोराशे जगत्पते।
🔷अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥
🔷ॐ सूर्याय नमः, आदित्याय नमः, भास्कराय नमः॥
🔶 इतना सब करने के बाद दान स्वरूप अपनी कमाई के एक अंश कहीं दान अवश्य करें या तो गरीब कन्याओं को भोजन करायें, निश्चित ही माँ गायत्री आपकी सभी मनोकामना पूर्ण करेंगी।
♦गायत्री जन्मोत्सव पर क्या करें
1. गायत्री मन्त्र का जप करके हवन करें।
2. सूर्य पूजा करें।
3. श्री आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ करें।
4. अन्न का दान करें।
5. गुड़ और गेहूं का दान करें।
6. पवित्र नदी में स्नान करें।
7. धार्मिक पुस्तक का दान करें।
8. इस दिन भंडारा करायें। लोगों को शीतल जल पिलायें।घर की छत पे जल से भरा पात्र रखें जिससे चिड़ियों के कंठ तृप्त हो सकें।
9. सत्य बोलनें का प्रयास करें।
10. फलाहार व्रत रहें।
11. किसी से कटु वाणी का प्रयोग मत करें।
13 .सूर्य के बीज मन्त्र का जप आपको प्रतिष्ठा दिलाएगा। 14. सूर्य पिता का कारक ग्रह है। पिता का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करें।