आगरालीक्स…आगरा को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए किए जा रहे प्रयास में कुछ मिसिंग है, सिविक सेंस की कमी भी है, संदेह करने वाली तमाम बातें हैं कि ये शहर कभी स्मार्ट हो पाएगा, बातें छोटी हैं पर प्रभाव बडे़.
आगरा को स्मार्ट सिटी बनाने के प्रयास दिख रहे हैं। कहीं सड़क बन रही है, कहीं दीवारों को पेंट कराया जा रहा है तो कहीं वॉल गार्डन तैयार हो रहे हैं, लेकिन कुछ मिसिंग है, सिविक सेंस की भी कमी है।
बातें बहुत छोटी-छोटी हैं लेकिन प्रभाव बडे़ हैं। सड़क नई बन रही है पर चलती मोटरसाइकिल से उसी सड़क पर पान की पीक सड़क पर उगल दी। पब्लिक टॉयलेट नजदीक है फिर भी टॉयलेट के लिए कहीं भी खड़े हो गए। कॉलोनी में सुबह ही कूड़ा उठाने वाली गाड़ी फेरे लगाने लगती है फिर भी घर की छत से पॉलिथिन में पैक कूड़ा दरवाजे से दूर उछाल दिया। इसमें से कुछ भी जायज नहीं है। इसी तरह की और भी हरकतें हैं जो दूसरा करे तो कोसते हैं जबकि खुद नजर बचाकर कर लिया जाए तो जैसे दुनिया ही जीत ली। सिविक सेंस की यही कमी स्मार्ट सिटी, स्वच्छता और ग्रीन आगरा के सपने को बर्बाद कर रही है।

इन दिनों हाईवे चकाचक नजर आ रहा है। सड़क नई बनाई जा रही है, साथ ही साथ पान की पीक से लाल भी होने लगी है। कई स्थानों पर दीवारों पर रंग रोगन किया गया है, लेकिन इन्हीं दीवारों के सहारे गंदगी फेंकी जा रही है। फ्लाईओवर्स के नीचे वॉल गार्डन बनाए जा रहे हैं, यहीं लोग टॉयलेट भी कर रहे हैं। कुछ देखरेख का अभाव भी नजर आ रहा है। हाईवे पर नगर निगम ने पौधा रोपण किया था, लेकिन इनकी देखरेख में कमी नजर आती है। कई स्थानों पर पौधे उखड़ गए हैं तो कई स्थानों पर सूख रहे हैं। इन हालातों में संदेह है कि यह शहर स्मार्ट हो पाएगा, जब तक नागरिक स्मार्ट नहीं होंगे।