आगरालीक्स…आगरा में डाक्टर ने महिला का कैंसर का इलाज शुरू कर दिया, जबकि उसे कैंसर नहीं था, फंसे डॉक्टर, जुर्माना लगा, जानें पूरा मामला
आगरा में डॉक्टर की लापवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें पीड़ित महिला और उसके परिजन कई दिन तक घुट घुट कर जीये. पित्त की थैली का आपरेशन कराने के बाद डॉक्टर की सलाह पर जब महिला ने एक पैथोलॉजी में बायोप्सी कराई तो जांच रिपोर्ट में उसे कैंसर बता दिया. चिकित्सक ने कैंसर विशेषज्ञ न होते हुए महिला का इलाज शुरू कर दिया और उसे कैंसर की दवाएं भी दीं. महिला को शक हुआ तो उसने दूसरी पैथोलॉजी में अपनी दोबारा जांच कराई, जिसमें कैंसर की पुष्टि नहीं हुई. महिला ने डॉक्टर और पैथोलॉजी लैब के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में परिवाद पेश किया जिसमें अब आयोग के आदेश पर डॉक्टर को 3.70 लाख रूपये का मुआवजा एवं एक लाख रूपये मानसिक पीड़ा पहुंचाने के रूप में देने होंगे.
2004 का है मामला
मामला वर्ष 2004 का है. आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर छह में रहने वाली सुमन शर्मा पत्नी मुरारीलाल शर्मा के अनुसार 7 मई 2004 को उन्हें पेट में दर्द की शिकायत थी. इसके लिए उन्होंने डॉक्टर एके सिंह को दिखाया. उन्होंने अल्ट्रासाउंड कराने को कहा जिसकी रिपोर्ट में पित्त की थैली में पथरी होने की पुष्टि हुई. इसके बाद महिला ने इसके लिए डॉक्टर एचएल राजपूत से उनके अस्पताल में संपर्क किया. डॉ. एचएल राजपूत ने पित्त की थैली का आपरेशन करने को कहा. 9 मई को सुमन शर्मा ने आपरेशन करा लिया जिसके बाद डॉक्टर एचएल राजपूत ने उन्हें बायोप्सी कराने को कहा और इसके लिए सूर्या डायोग्नस्टिक पैथोलौजी तुलसी कांप्लेक्स रामनगर पुलिया पर जाने को कहा. महिला ने यहां बायोप्सी कराई तो पैथोलॉजी ने अपनी रिपोर्ट में उन्हें कैंसर बताया.

जांच में कैंसर आने से महिला और उसके परिवार वाले तनाव में आ गए. सुमन के अनुसार उन्होंने यह रिपोर्ट डॉ. राजपूत को दिखाई तो उन्होंने इसे गंभीर बताते हुए तत्काल उपचार शुरू करने की सलाह दी और उनकी कैंसर थेरेपी शुरू कर दी. सुमन के अनुसार वह पैथोलॉजी की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं थी जिसके बाद उन्होंने आजाद नगर स्थित लाइफ लाइन मल्टी स्लाइस स्प्रिरल सीटी सकैन सेंटर में दोबारा जांच कराई, लेकिन यहां भी रिपोर्ट में कैंसर की पुष्टि हुई. इससे सुमन और उनका पूरा परिवार मानसिक रूप से ज्यादा तनाव में आ गया. लेकिन सुमन ने इसके बाद दिल्ली गेट स्थित साइंटिफिक पैथोलॉजी पर अपनी जांच कराई तो यहां रिपोर्ट में कैंसर की पुष्टि नहीं हुई.
सुमन ने इसके बाद बाद नेहरू नगर स्थित कैंसर विशेषज्ञ डॉ. अतुल गुप्ता से परामर्श लिया. चिकित्सक ने उनकी दो जांच कराई जिसमें कैंसर के कोई लक्षण नहीं पाए गए. सुमन के अनुसार गलत रिपोर्ट के चलते उन्हें कैंसर की दवाइयों को भी खाना पड़, जिसके कारण उन पर आर्थिक बोझ पड़ा. इस मामले में सुमन ने वर्ष 2005 में उपभोक्ता आयोग द्वितीय में परिवाद प्रस्तुत किया. जिसमें हीराश्री हास्पीटल एंड रिसर्च सेंअर भोगीपुरा शाहगंज के निदेशक डॉ. एचएच राजपूत, सूर्या डायोग्नास्टिक पैथोलॉजी के डॉक्टर रविंद्र कंसलटेंट पैथोलिस्ट, लाइफ लाइन मल्टी स्लाइस स्प्रिरल सीटी स्कैन सेंटर आजाद नगर खंदारी एंव न्यू इंडिया इंश्यारेंस कंपनी लिमिटेड को पक्षकार बनाया और उनसे 3.70 लाख रूपये मुआवजा दिलाने के लिए मुकदमा पेश किया था.
अब उपभोक्ता आयोग द्वितीय ने परिवाद में दोनों पक्ष के तर्क सुने और पाया कि डॉक्टर एचएल राजपूत ने कैंसर विशेषज्ञ न होते हुए भी परिवादिनी को संभावित कैंसर के गुण नष्ट करने की थेरेपी की जो कि एक घोर लापरवाही पेश करती है. आयोग के अध्यक्ष अशुतोष एवं सदस्यों राजीव सिंह, पारूल कौशिक ने अपने आदेश में कहा कि डॉक्टर राजपूत का यह कृत्य परिवादिनी के प्रति सेवाम ें घोर लापरवाही पेश करता है. आयोग ने डॉक्टर एचएल राजपूत को 3.70 लाख रूपये मुआवजा कए जनवरी 2005 से छह फीसद व्याब की दर से आदेश की तारीख से 30 दिन के अंदर परिवादिनी को देने के आदेश दिए. इसके साथ ही मानसिक पीड़ाके रूप् में एक लाख रूपये और देने को कहा. आयोग ने दोनों पैथोलॉजी पर जुर्माना नहंी लगाया. पैथोलॉजी का कहना था कि उसने जांच में अपनी ओपनियन दी थी. कैंसर होने की रिपोर्ट नहीं दी थी. इस पर आयोग ने दोनेां पैथोलॉजी पर जुर्माना नहीं लगाया.