आगरालीक्स…आगरा के होटल व्यवसाइयों की पीड़ा, कहा— कैसे करें अतिथि देवो भव: का अनुसरण. जीएसटी मांगने पर हर दिन होता है पर्यटकों से झगड़ा…ये की मांग
आगरा के होटल व्यवसाइयों ने अपनी पीड़ा जाहिर की है. उन्होंने होटल व्यवसाय पर जीएसटी दरें बढ़ाए जाने पर न सिर्फ रोष जताया है बल्कि अपनी परेशानी और समस्याएं भी जाहिर की हैं. आगरा होटल एंड रेस्टोरेंट आनर्स एसोसिएशन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र भेजा है. जिसमें उन्होंने लिखा है कि पूर्व में होटल व्यवसाय पर एक हजार रुपये प्रतिदिन प्रति कमरा पर जीएसटी की पूर्ण छूट थी. उसके ऊपर के कमरे के किराये पर जीएसटी की दरें निर्धारित की गई थीं लेकिन अब इसमें बदलाव कर किसी भी दर के किराये के कमरे पर 12 प्रतिशत जीएसटी की दर निर्धारित कर दी गई हैं जो कि बजट क्लास किराये वाले होटल व्यवसाइयों के लिए पूर्ण अव्यवहारिक है.

होटल व्यवसाइयों का कहना है कि हम चाहते हैं कि एक हजार रुपये प्रतिदिन कमरे की दर वाले बजट क्लास होटल ही आते हैं. इनमें आने वाले पर्यटकों का बजट भी बहुत कम होता है. जब हम इन पर्यटकों से 12 प्रतिशत जीएसटी की मांग करते हैं तो वह देने से इंकार करता है. जयादा कुछ कहने और समझाने पर वह दुव्यर्वहार करने लगता है जिससे आये दिन पर्यटकों से जीएसटी की दर के कारण झंझट होता है. अन्यथा की स्थिति में जीएसटी का भाव भी स्वयं होटल व्यसाइयों को वहन करना पड़ता है.
होटल व्यवसाइयों ने मांग की है कि हम 1000 रुपये प्रतिदिन प्रति कमरे के किराये पर पर्यटकों को बेसिक सुविधाएं भी प्रदान नहीं कर पाते हैं. संस्था पूर्व में भी कई बार मांग कर चुकी है कि महंगाई के मद्देनजर दो हजार रुपये प्रतिदिन किराये वाले कमरों पर पूर्णता छूट प्रदान की जाए या अन्य व्यवसायों की तरह जीएसटी की छूट 20 लाख रुपये सालाना सेल को बढ़ाकर 40 लाख रुपये सालाना कर दिया जाए जिससे कि हम बजट क्लास होटल व्यवसायी भी पर्यटकों को बेसिक सुविधाओं के साथ अच्छा वातावरण प्रदान करते हुए अतिथि देवो भव’ का अनुसरण कर सकें.