आगरालीक्स…कलियुग के कल्याणकारी पर्वों में से एक सोमवती अमावस्या कल। अक्षय पुण्य लक्ष्मी, सुख-समृद्धि एवं सौभाग्य की प्राप्ति संभव। करने होंगे कुछ उपाय।

सोमवती अमावस्या को पूरे जीवन तरसे पांडव

श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरू रत्न भण्डार वाले ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा बताते हैंकि सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस वर्ष यह हिंदी (हिंदू पंचांग) वर्ष के आखिरी दिन पड़ रही है। इस वजह से भी यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कहा जाता है पांडव तरसते रहे लेकिन उनके जीवन में सोमवती अमावस्या पड़ी ही नहीं।
चंद्र देवता को समर्पित दिन
सोमवार चंद्र देवता कों समर्पित दिन है,भगवन चंद्र को मन का कारक माना जाता है अतः इस दिन अमावस्या पड़ने का अर्थ है की यह दिन मन सम्बन्धित दोषो को दूर करने के लिए उत्तम है। हमारे शास्त्रो में चंद्रमा को ही दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टो का कारक माना जाता है, अतः यह पूरे वर्ष में एक या दो बार ही पड़ने वाले पर्व का बहुत अधिक महत्त्व माना जाता है। विवाहित स्त्रियों के द्वारा इस दिन पतियों की दीर्घ आयु के लिये व्रत का विधान है।
भगवान शिव का भी है दिन
सोमवार को भगवन शिव एवं चंद्र का दिन माना जाता है।सोम यानि चन्द्रमा अमावस्या और पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा यानि सोमांश या अमृतांश सीधे-सीधे पृथ्वी पर पड़ता है। शास्त्रों के अनुसार सोमवती अमावस्या के दिन चन्द्रमा का अमृतांश पृथ्वी पर सबसे अधिक पड़ता है।
भक्तों को होती है अमृत की प्राप्ति
🔷 अमावस्या अमा और वस्या दो शब्दों से मिलकर बना है।शिव पुराण में इस संधि विच्छेद को भगवान् शिव ने माँ पार्वती को समझाया था।क्योंकि सोम को अमृत भी कहा जाता है अमा का अर्थ है एकत्रित करना और वास को वस्या कहा गया है।यानि जिसमे सभी वास करते हो वह अति पवित्र अमावस्या कहलाती है यह भी कहा जाता है की सोमवती अमावस्या में भक्तो को अमृत की प्राप्ति होती है।
मौनव्रत से गोदान का पुण्य
🔶 निर्णय सिंधु व्यास के वचनानुसार इस दिन मौन रहकर स्नान-ध्यान करने से सहस्त्र गौ दान का पूण्य मिलता है।
पीपल की पूजा से समस्त पापों का नाश
🔷 शास्त्रों के अनुसार पीपल की परिक्रमा करने से ,सेवा पूजा करने से, पीपल की छाया से,स्पर्श करने से समस्त पापो का नाश, अक्षय लक्ष्मी की प्राप्ति होती है व आयु में वृद्धि होती है।
मनोकामना पूर्ण करने को यह करें उपाय
🔶 पीपल के पूजन में दूध, दही, मिठाई,फल, फूल,जनेऊ, का जोड़ा चढाने से और घी का दीप दिखाने से भक्तो की सभी मनोकामनाये पूरी होती है।
पीपल में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास
पीपल के मूल में भगवान् विष्णु तने में शिव जी तथा अगर भाग में ब्रह्मा जी का निवास है।इसलिए सोमवार को यदि अमावस्या हो तो पीपल के पूजन से अक्षय पूण्य लाभ तथा सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
विवाहित स्त्रियां यह कर सकती हैं उपाय
🔷 इस दिन विवाहित स्त्रियों द्वारा पीपल के पेड़ की दूध,जल,पुष्प,अक्षत,चन्दन आदि से पूजा और पीपल के चारो और १०८ बार धागा लपेट कर परिक्रमा करने का विधान होता है और हर परिक्रमा में कोई भी मिठाई या फल चढाने से विशेष लाभ होता है।ये सभी १०८ फल या मिठाई परिक्रमा के बाद ब्राह्मण या निर्धन को दान करे।इस प्रक्रिया को कम से कम ३ सोमवती तक करने से सभी समस्याओ से मुक्ति मिलती है।इस प्रदक्षिणा से पितृ दोष का भी निश्चित समाधान होता है।
तुलसी या मां पार्वती को सिंदूर चढ़ाएं
🔶 इस दिन जो भी स्त्री तुलसी या माँ पार्वती पर सिंदूर चढ़ा कर अपनी मांग में लगाती है वह अखंड सौभाग्यवती बनी रहती है।
काल सर्प दोष से मुक्ति को यह करें
🔷 जिन जातको की जन्म पत्रिका में कालसर्प दोष है।वे लोग यदि सोमवती अमावस्या पर चांदी के बने नाग-नागिन की विधिवत पूजा कर उन्हें नदी में प्रवाहित करे,शिव जी पर कच्चा दूध चढाये,पीपल पर मीठा जल चढ़ा कर उसकी परिक्रमा करें,धुप दीप दिखाए,ब्राह्मणों को यथा शक्ति दान दक्षिणा दे कर उनका आशीर्वाद ग्रहण करे तो निश्चित ही काल सर्प दोष की शांति होती है।
व्यवसाय में परेशानी तो तिल के तेल का दीपक
🔶 इस दिन जो लोग व्यवसाय में परेशानी उठा रहे है,वे पीपल के नीचे तिल के तेल का दिया जलाकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मन्त्र का कम से कम 5 माला जप करे तो व्यवसाय में आ रही दिक्कते समाप्त होती है।इस दिन अपने पितरों के नाम से पीपल का वृक्ष लगाने से जातक को सुख, सौभग्य,पुत्र की प्राप्ति होती है,एव पारिवारिक कलेश दूर होते है।
नदियों में स्नान का महत्व
🔷 इस दिन पवित्र नदियो में स्नान,ब्राह्मण भोज,गौ दान, अन्नदान,वस्त्र,स्वर्ण आदि दान का विशेष महत्त्व माना गया है,इस दिन गंगा स्नान का भी विशिष्ट महत्त्व है।
माँ गंगा या किसी पवित्र सरोवर में स्नान कर शिव-पार्वती एवं तुलसी की विधिवत पूजा करें।
भगवान शिव की आराधना करें
🔶 भगवान् शिव पर बेलपत्र, बेल फल, मेवा, मिठाई, जनेऊ का जोड़ा आदि चढ़ा कर ॐ नमः शिवाय की ११ माला करने से असाध्य कष्टो में भी कमी आती है।
🔷 प्रातः काल शिव मंदिर में सवा किलो साबुत चांवल दान करे।
सूर्य को पूजा से दरिद्रता होती है दूर
🔶 सूर्योदय के समय सूर्य को जल में लाल फूल,चन्दन डाल कर गायत्री मन्त्र जपते हुए अर्घ देने से दरिद्रता दूर होती है।
🔷 सोमवती अमावस्या को तुलसी के पौधे की ॐ नमो नारायणाय जपते हुए १०८ बार परिक्रमा करने से दरिद्रता दूर होती है।न
गाय को खिलाएं दही और चावल
🔶 जिन लोग का चन्द्रमा कमजोर है वो गाय को दही और चांवल खिलाये अवश्य ही मानसिक शांति मिलेगी।
🔷मन्त्र जप,साधना एवं दान करने से पूण्य की प्राप्ति होती है।
यह उपाय भी अपनाएं
🔶 इस दिन स्वास्थ्य, शिक्षा, कानूनी विवाद, आर्थिक परेशानियो और पति-पत्नी सम्बन्धि विवाद के समाधान के लिए किये गए उपाय अवश्य ही सफल होते है।
🔷 इस दिन धोबी-धोबन को भोजन कराने,उनके बच्चों को किताबे मिठाई फल और दक्षिणा देने से सभी मनोरथ पूर्ण होते है।
🔶 सोमवती अमावस्या को भांजा,ब्राह्मण, और ननद को मिठाई, फल,खाने की सामग्री देने से उत्तम फल मिलाता है।
🔷 इस दिन अपने आसपास के वृक्ष पर बैठे कौओं और जलाशयों की मछलियों को (चावल और घी मिलाकर बनाए गए) लड्डू दीजिए। यह पितृ दोष दूर करने का उत्तम उपाय है।
🔶 सोमवती अमावस्या के दिन दूध से बनी खीर दक्षिण दिशा में (पितृ की फोटो के सम्मुख) कंडे की धूनी लगाकर पितृ को अर्पित करने से भी पितृ दोष में कमी आती है।
🔷 अमावस्या के समय जब तक सूर्य चन्द्र एक राषि में रहे, तब कोई भी सांसरिक कार्य जैसे-हल चलाना, कसी चलाना, दांती, गंडासी, लुनाई, जोताई, आदि तथा इसी प्रकार से गृह कार्य भी नहीं करने चाहिए।