आगरालीक्स…अब डॉक्टर फेंफड़ों के अंदर झांककर देख रहे हैं. सांस की नली सिकुड़ी हुई हैं. फेंफड़ों की क्षमता हो रही कम. आगरा में जुटे विशेषज्ञों ने टीबी, सांस की बीमारी की समस्या, इलाज और बचाव के बारे में की चर्चा
एमडीआर टीबी पर काबू पाना चुनौतीः डॉ. कटोच
2025 में टीबी मुक्त भारत के लिए सरकार ने अपना पूरा काम कर दिया है। अब निजी डॉक्टरों के साथ ही प्राइवेट सेक्टर को मिलकर काम करना है। अभी भी कहीं पर चूक हो रही है, इसके कारण टीबी रजिस्टेंट केस कम नहीं हो रहे हैं, जबकि ट्रीटमेंट की गाइड लाइन भी उपलब्ध हैं। टीबी के ट्रीटमेंट में किसी भी स्तर पर बदलाव कि लिए जरूरी है कि एवीडेंस बेस्ट बदलाव किया जाए, डाटा होना चाहिए जिसके आधार पर कहा जा सके कि यह बदलाव करना है। टीबी मुक्त अभियान जनआंदोलन बन चुका है, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप से इसे मुकाम तक पहुंचाना है। यह बात आज ट्यूबरक्लोसिस एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा डिपार्टमेंट ऑफ ट्यूबरक्लोसिस एंड रेस्पीरेटरी डिजीज, एसएन मेडिकल कालेज व यूपी टीबी एसोसिएशन एंड द यूनियन साउथ ईस्ट एशिया रीजन के सहयोग से तीन दिवसीय नेटकॉन-2023 (77वीं नेशनल कांफ्रेंस ऑफ ट्यूबरक्लोसिस एंड चेस्ट डिजीज) के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि ट्यूबरक्लोसिस एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. वी एम कटोच ने मुख्य अतिथि के रूप में नेटकॉन के उद्घाटन में कही। विशिष्ठ अतिथि इंटरनेशनल यूनियन एगेन्स्ट टीबी एंड लंग्स डिजीज के वर्ड प्रसीडेंट प्रोफ़ेसर गाय मार्क(आस्ट्रलिया) थे।

अतिथियों का स्वागत एसएन मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. प्रशान्त गुप्ता व धन्यवाद ज्ञापन एसएन वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के प्रोफ़ेसर व आयोजन समिति के सचिव डा० गजेंद्र विक्रम सिंह ने दिया। संचालन डॉ. प्रशान्त प्रकाश ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से टीएआई के चेयरमैन वीके अरोरा, उपाध्यक्ष डॉ. अश्विनी खन्ना, नेटकॉन के अध्यक्ष डॉ. बी वेसले, आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार, सचिव डॉ. जीवी सिंह, डॉ. एएस सचान, डॉ. राजेश गुप्ता, नेटकॉन साइटिफिक कमेटी के चेयरमैन डॉ. सूर्यप्रकाश, एसएन मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. प्रशान्त गुप्ता, यूपीटीबी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, सचिव डॉ. टीपी सिंह आदि मौजूद थे।
इन्हें मिला ओरेशन अवार्ड
नागपुर की डॉ. राधा मुंजे, जयपुर की डॉ. नंदनी शर्मा, पटियाला से डॉ. विशाल चौपड़ा, डॉ. जयकिशन को ओरेशन अवार्ड प्रदान किए गए। लाइफ टाइम अटीवमेंट अवार्ड से उदयपुर के डॉ. एसके … को प्रदान किया गया।
विश्व में टीबी के 30 फीसदी मरीज भारत में
विश्व में टीबी के एक करोड़ 60 लाख मरीज है। यानि एक लाख पर 134 मरीज। विश्व में टीबी के कुल मरीजों में भारत में 30 फीसदी यानि 30 लाख मरीज है। भारत में एक लाख में से 210 मरीज टीबी से पीड़ित हैं। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज प्रयागराज के डॉ. अमिताभ दास गुप्ता ने 2022 की डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि 2025 तक भारत को टीबी मुक्त देश बनाना भारत सरकार की प्राथमिकता में है। डी सेन्ट्रेलाइजेशन ऑफ मॉलीक्यूलर डायग्नोस्टिक इन टीबी विषय पर व्याख्यान में कहा कि टीबी की जांचे अब तक जिला केन्द्र में उपलब्ध थीं। जिन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर पहुंचाया जा रहा है। वहीं एमडीआर टीबी की जांच की रिपोर्ट में लगभग 3 माह का समय लगता था, अब आधुनिक मशीनों से एक दिन में हो रही है।
वहीं सरकारी मेडिकल कालेज पटियाला (पंजाब) के वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल चौपड़ा ने कहा कि भारत में 90 के दशक में एमडीआर (मल्टी ड्रग रजिस्टेंस) टीबी के मरीज लगभग 2-3 फीसदी थे, जिनकी संख्या बढ़कर अब लगभग 21 फीसदी हो गई है। कहा कि सरकार की स्वास्थ योजनाओं ने टीबी का इलाज मरीजों को फ्री मिल रहा है, लेकिन सामान्य टीबी के मरीज पर यदि सरकार को इलाज में एक रुपया खर्चना पड़ता है तो वहीं एमडीआर टीबी के मरीजों पर सौ रुपए खर्चने पड़ रहे हैं। रिफेम्पिसिन व आइसोनाइजिड दवाओं के प्रति मरीजों में प्रतिरोधकता पढ़ रही। वजह कुछ माह दवा लेकर स्वस्थ महसूस लगने पर मरीज इलाज बीच में छोड़ देते हैं, जिससे दवाओं के प्रति प्रतिरोधकता पैदा हो जाती है और इलाज महंगा व रोग जटिल हो जाता है।
सीओपीडी है तो हृदय का रखें खास खयाल
इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस बीएचयू के डॉ. मोहित भाटिया ने अपने व्याख्यान (सीओपीडी में मरीज के दिल पर पड़ने वाले प्रभाव) में कहा कि सीओपीडी (क्रोनिक, एब्स्ट्रेक्टिव पल्मोननरी डिजीज) के मरीजों को अपने हृदय का खास खयाल रखना चाहिए। क्योंकि ध्रूमपान से होने वाली सीओपीडी और हदय रोग दोनों के रिस्क फैक्टर समान होने के साथ सीओपीडी की कुछ दवाओं का हदय पर साइड इफेक्ट भी रहता है। सीओपीडी के मरीजों में हृदय तक पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन न पहुंचने के कारण पल्मोनरी आर्टरी पर भी दबाब बढ़ने से हृदय पर भी असर पड़ता है। सीओपीडी में थोड़ा चलने फिरने पर सांस फूलने लगती है, जिससे व्यक्ति का धूमना फिरना कम होने से भी हृदय पर प्रतिकूल असर पड़ता है। यदि आप सीओपीडी से पीड़ित हैं, तो ध्रूमपान से तौबा करने के साथ अपने हृदय का भी खास खयाल रखें।
आठ वर्कशॉप में 300 विशेषज्ञों ने लिया प्रशिक्षण
ट्यूबरक्लोसिस एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा डिपार्टमेंट ऑफ ट्यूबरक्लोसिस एंड रेस्पीरेटरी डिजीज, एसएन मेडिकल कालेज व यूपी टीबी एसोसिएशन एंड द यूनियन साउथ ईस्ट एशिया रीजन के सहयोग से तीन दिवसीय नेटकॉन-2022 (77वीं नेशनल कांफ्रेंस ऑफ ट्यूबरक्लोसिस एंड चेस्ट डिजीज) में आज आठ वर्कशॉप का आयोजन किया गया। एसएन मेडिकल कालेज, टीबी ट्रेनिंग एंड डिमोन्सट्रेशन सेंटर, व होटल जेपी में ब्रांकोस्कोपी, एडवांस ब्रोंकोस्कोपी, एडवांस पीएफटी, स्लीप मेडिसन वर्कशॉप, एलर्जी अस्थमा इम्यूनोलॉजी, चेस्ट का अल्ट्रासाउंड, एमडीआर टीबी पल्मोनरी रीबैहलीटेशन (पुर्नवास) विषय पर वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिसमें देश भर के लगभग 300 विशेषज्ञों ने ट्रेनिंग ली।