आगरालीक्स ..आगरा की संस्था की इलाज के नाम पर मदद की सोशल मीडिया पर खुली पोल, एक्सीडेंट में घायल 11 वीं के छात्र के लिए युवा एक्टिविस्टों ने जुटाए छह लाख, संस्था ने 25 हजार देकर लूटी वाहबाही, मां ने लौटाए रुपये।

आगरा के डॉ. एमपीएस स्कूल के 11 वीं का छात्र दिव्यांश जैन का 11 मार्च को एक्सीडेंट हो गया था. दिव्यांग के पिता का कोरोना में निधन हो गया था, मां शालू जैन के पास इलाज के लिए रुपयों का इंतजाम नहीं था,
तीन अस्पतालों ने भर्ती करने से किया इन्कार, इस तरह जुड़ता गया मदद का काफिला
दिव्यांश जैन को तीन अस्पतालों ने भर्ती नहीं किया, इसके बाद प्रवीन अग्रवाल ने 2.30 बजे यशवंत हॉस्पिटल में भर्ती करवाया। उसी दिन रात को सबसे पहले हैंड रिटिंन लेटर छात्र के कोचिंग टीचर अनिल रजवानी ने सोशल मीडिया पर डाली और सबको फेसबुक और व्हाट्सएप पर पोस्ट करने की अपील की। सुबह नर्मिता अग्रवाल की कॉल के बाद हेमंत गौड सहित अन्य युवा सोशल मीडिया पर एक्टिव हुए हैं। छात्र के कोचिंग टीचर , विद्यालय , सोशल मीडिया, कुछ समाजसेवी संगठन, आगरा और देश के अलग अलग लोगों द्वारा सहयोग किया गया है।
सोशल मीडिया की मदद से जुटाए छह लाख
युवा एक्टिविस्ट हेमंत गौड को पता चला, उन्होंने सोशल मीडिया की मदद ली और दिव्यांश जैन की मां का बैंक एकाउंट और मोबाइल नंबर शेयर कर दिया। एकाउंट में मदद आने लगी, कुछ लोगों ने नकारात्मक सवाल भी किए उनके भी जवाब दिए गए। दिव्यांश का आपरेशन कर दिया या, अभी तक करीब छह लाख रुपये फंड आ चुका है और अब लोगों से मना कर दिया गया है कि वे एकाउंट में और रुपये न डालें।
संस्था को लौटाए 25 हजार
इसी दौरान एक संस्था भी सक्रिय हुई, संस्था के पदाधिकारियों ने 25 हजार रुपये की आर्थिक मदद की और समाचार पत्रों में दिव्यांश की जान बचाने के लिए आर्थिक मदद का हवाला देते हुए विज्ञप्ति जारी कर दी, समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने संस्था को ट्रोल करना शुरू कर दिया। संस्था के बारे में तमाम तरह की बातें करते हुए लिखा कि जिन लोगों ने छह लाख रुपये दिए और जिनकी मदद से यह रुपये आए उनके बारे में संस्था ने एक शब्द नहीं लिखा और यह बता दिया कि उनकी मदद से ही दिव्यांश का इलाज हो रहा है। कितनी मदद की यह भी संस्था ने विज्ञप्ति में नहीं लिखा। इसके बाद संस्था को सोशल मीडिया पर ट्रोल करना शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि संस्था के पदाधिकारी दिव्यांश की मां से मिले, उन्होंने रोते हुए संस्था को 25 हजार रुपये भी लौटा दिए।
सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट
मात्र 25,000 देकर अपना महिमामंडन खुद कैसे किया जाता है ये आप वरिष्ठ समाज सेवकों से सीखें।
अरे मालिक साहब कम से उन लोगों का तो ख्याल किया होता जो बेचारे फेसबुक पोस्ट के माध्य्म से देश के कौने कौने से पैसा भेज रहे हैं या वो बच्चे के दोस्त / टीचर्स / कुछ गुप्तदानी / आगरा के निवासी जो खुद आकर पैसा कैश देकर जा रहे हैं माता के हाथों में या एकाउंट में भेज रहे हैं।
वैसे इस तरह के धर्मार्थ सेवा कार्य में किसी को क्रेडिट नहीं लेना चाहिए….ऊपर क्या मुँह दिखाएंगे?
इसीलिए मैं इन सबको बेशर्म गिद्ध कहता हूँ।
खैर जाकी रही भावना जैसी…. जो आप लोगों ने किया है उसका हिसाब महादेव के पास है और आप लोग बालक के लिए प्रार्थना करें।