आगरालीक्स…आगरा में कथावाचक राजन जी महाराज ने कहा—धर्म विरोधी फिल्मों पर प्रतिबंध लगना चाहिएः. दर्शक के मन पर पड़ता है गलत प्रभाव
श्रीराम कथा वाचक एवं मानस मर्मज्ञ राजन जी महाराज ने कहा है कि यदि फिल्म में किसी भी धर्म का दोष बताया जाता है तो उस पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। किसी भी धर्म की आलोचना करने का किसी को अधिकार नहीं है। राजन जी इन दिनों बल्केश्वर महादेव मंदिर, बल्केश्वर में हो रही श्रीराम कथा में कथा श्रवण करा रहे हैं। सीताराम कालोनी, बल्केश्वर में समाजसेवी रामनिवास गुप्ता के आवास पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि फिल्मों में किसी भी धर्म के खिलाफ टीका टिप्पणी की जाती है या उसे गलत रूप में प्रदर्शित किया जाता है तो यह एक अपराध है। क्योंकि उसका दर्शक के मन पर गलत प्रभाव पड़ता है। इसलिए एसी फिल्मों को प्रतिबंधित कर देना चाहिए।
एक प्रश्न के जबाव में उन्होंने कहा कि यह कहना अनुचित है कि युवा पीढ़ी अध्यात्म से भटक रही है, बल्कि इस ओर उसका ज्यादा झुकाव है। तीर्थ स्थलों व देवालयों में युवा पीढ़ी की संख्या बढ़ रही है। बल्कि तीर्थ स्थलों के साधना स्थलों पर शांति की खोज में युवा पीढ़ी पहुंच रही है। बच्चे बहुत अच्छे मार्ग पर चल रहे हैं, बस थोड़ा सा ध्यान देने और गाइड करने की जरूरत है। हिंदू राष्ट्र के प्रश्न पर राजन जी महाराज ने कहा कि हमारा देश तो आदि काल से ही हिंदू राष्ट्र है। यह तो ऋषियों की भूमि है। नदी, महासागर, पर्वत आदि सभी के नाम हिंदू देवी-देवताओं, ऋषि-महर्षियों के नाम पर है। इसलिए यह कहना उचित नहीं कि कोई हिंदू राष्ट्र बनाएगा। शहरों के नाम बदल देने से ही यह हिंदू राष्ट्र नहीं हो सकता। लिविंग रिलेशन को उन्होंने अधर्म बताया कहा कि जिस बात की अनुमति धर्म नहीं देता, वह अधर्म है। जिस देश, समाज और परिवार में अधर्म होगा, उसमें मंगल हो ही नहीं सकता। कन्या भ्रूण हत्या को भी उन्होंने महापाप बताया।
कलियुग में श्रीराम नाम ही मुक्ति का आधार : राजन जी महाराज
मानस मर्मज्ञ राजन जी महाराज ने कहा है कि कलयुग में राम नाम मात्र से ही भव सागर को पार कर जीवन को कल्याणकारी बनाया जा सकता है। कलयुग में राम का नाम मुक्ति का आधार है। राजन जी यहां बल्केश्वर में श्रीराम कथा का वाचन कर रहे हैं। बुधवार को चतुर्थ दिन कहा कि कलियुग में राम का नाम ही एक आधार है। जिसको स्मरण करने से निकृष्ट भी पवित्र हो जाता है। उन्होंने कहा कि कलियुग में न कर्म है, न भक्ति है और न ज्ञान है। उन्होंने यह भी कहा कि राम का नाम संजीवनी बूटी की तरह है, जो रह रोग-शोक को दूर करता है। इसलिए हर व्यक्ति को राम नाम की महिमा का गान करना चाहिए।

राजन जी महाराज ने कहा कि निशाचर के आतंक से परेशान होकर जब ऋषि विश्वामित्र अयोध्या जाकर राजा दशरथ के दोनों पुत्र राम और लखन को मांगा, तो राजा दशरथ उदास हो गए। तब विश्वामित्र ने कहा कि उदास मन से किसी को कुछ नहीं देना चाहिए। राजा दशरथ ने मुनि को राम लखन सौंप दिए और कहा कि आज से आप इन दोनों बच्चों पिता है। वहां से मुनि दोनों को लेकर चले तो रास्ते में ताड़का का वध, अहिल्या का उद्धार किया। भगवान राम ने उन सबका उद्धार किया जो उपेक्षित और वंचित थे।
धनुष यज्ञ की चर्चा करते हुए राजन जी ने कहा भगवान राम अपने भाइयों सहित जनक भवन में राजा जनक द्वारा आहूत धनुष यज्ञ मैं भाग लेने मिथिला पहुंच गए। सभी राजा धनुष को हिलाने तक में असमर्थ रहे, भगवान श्री राम ने शिव धनुष को तोड़कर राजा जनक की प्रतिज्ञा का मान रखा धनुष स्पर्श करते ही टूट गया। इसके साथ ही राम और सीता के जयघोष वहां गूंज उठे। पंडाल में जयघोष गूंजते रहे। बधाइयां गाई गई और उल्लासमय माहौल रहा। राजन जी ने कहा कि भक्ति के बिना भवसागर से मुक्ति सम्भव नहीं।