आगरालीक्स…सत्य ही है श्रीमद्भागवत कथा का परमतत्व, विनम्र लोग ही कथा सुनने के अधिकारी. समाधि पार्क सूर्य नगर मंदिर में चल रही कथा में सुनाई आज ये कथाएं
श्रीहरि की स्तुति वो औषधि है जिसने वाणों की शैय्या पर लेटे भीष्म पितामह के शरीर से शत्रों के प्रहार की पीड़ा को भी हर लिया। कुंति ने सदा श्रीहरि की निकटता पाने के लिए दुखों को मांगा। श्रीहरि से कुन्ति ने कहा कि ऐसी कृपा कीजिए कि मैं सदा आपसे प्रेम करती रहूं, मेरी बुद्धि सदा आपमें लिप्त रहे, और कहीं न जाए। आप यदुवंश के शिरोमणी है, आप ही इस जगत पर दैत्यों को जलाने के लिए अग्निरूप हैं। आपकी शक्ति की कोई थाह नहीं।

समाधि पार्क, सूर्य नगर मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आज कथा वाचक श्री दिनेश दीक्षित ने अपने मुखारबिन्द से भीष्म स्तुति व कुन्ति स्तुति का वर्णन किया। कहा कि श्रीहरि उस हर भक्त के हृदय में विराजमान है, जिसके हृदय में विनम्रता और सच्चाई है। संत कबीरदास के दोहे (सांच बराबर तप नहीं झूठ बराबर पाप, जाके हृदय सांच है, ताके हृदय आप) की व्याख्या करते हुए कहा कि श्रमद्भागवत कथा का परमतत्व सत्य ही है। कहा कि हम सत्य को छोड़कर जीवन में सब कुछ ग्रहण कर लेते हैं। हमारे जीवन का ध्येय सत्य, देह धर्म और पेय श्रीमद्भगवत गीता का अमृतरूपी रस होना चाहिए। कहा कि कथा सुनने के लिए विनम्रता बहुत जरूरी है। सिर्फ विनम्र लोग ही सता सुनने के अधिकारी हैं। शुकदेव के प्राकट्य व कलियुग आगमन की कथा का भी वर्णन किया। कथा से पूर्व अमित त्रिवेदी ने दीप प्रज्ज्वलित किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रभाकर शर्मा, अनीता त्रिवेदी, एचपी सिंह, डॉ. महावीर सिंह राजपूत, डॉ. डीपी शर्मा, डॉ. सुवर्चा शर्मा आदि उपस्थित थीं।