आगरालीक्स…शनिदेव ने बदली अपनी चाल. अब 140 दिनों तक उल्टे चाल से करेंगे गति. जानिए किस राशि पर क्या प्रभाव
17 जून को रात 10 बजकर 48 मिनट से न्याय और कर्मफलदाता शनि कुंभ राशि में रहते हुए वक्री हो गए हैं. वक्री का मतलब होता है उल्टी चाल चलना. शनिदेव 140 दिनों तक कुंभ राशि में रहते हुए उल्टे चाल से गति करेंगे. शनि के वक्री चाल से सभी राशियों के जातकों पर इसका शुभ व अशुल्भ प्रभाव देखने को मिलेगा. शनि कुंभ राशि में रहने वाले हैं. आपको बता दें कि इससे पहले शनि 1994 और 1995 में कुंभ राशि में रहते हुए वक्री हुए थे.

9 ग्रह और उनकी वक्री चाल
वैदिक ज्योतिष में ग्रहों का राशि परिवर्तन और उनकी चाल में बदलाव काफी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सभी 9 ग्रहों में सूर्य और चंद्रमा ही ऐसे दो ग्रह जो कभी भी वक्री चाल से नहीं चलते हैं। ये दोनों ही ग्रह हमेशा मार्गी रहते हुए ही चलते हैं। वहीं दो ऐसे ग्रह हैं जो हमेशा वक्री ही चलते हैं। ये दो ग्रह हैं राहु और केतु। जबकि अन्य सभी ग्रह मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि समय-समय पर मार्गी और वक्री होते रहते हैं।
शनि देव की यह वक्री चाल 4 नवंबर 2023 तक रहेगी जिसके बाद यह कुंभ राशि में ही मार्गी हो जाएंगे. शनि के वक्री होने पर देश दुनिया में प्राकृतिक आपदाओं का जोर बढ़ सकता है. दुूर्घटनाएं बढ़ने के संकेत हैं और देश दुनिया में राजनीति के क्षेत्र में उथल पुथल हो सकती है. सभी जानते हैं कि शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं और यह किसी एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं. शनि के कुंभ में वक्री होने से मकर, कुंभ, मीन, कर्क और वृश्चिक राशि वालों को ज्यादा सावधानी बरतनी होगी.