आगरालीक्स…आगरा में पहली बार लगा मुद्रा उत्सव. 2600 साल पुराना देश का पहला सिक्का देखें और समुद्रगुप्त के समय का सिक्का और कागज के सिक्के भी..देखकर रह जाएंगे दंग
आगरा के छीपीटोला स्थित एसबीआई बैंक में इस समय मुद्रा उत्सव मेला लगा हुआ है. शुक्रवार, शनिवार के बाद आज रविवार को भी यहां मेला है जिसमें देश की पुरानी से पुरानी करेंसी लोगों के सामने आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. हजारों साल पुराने और आज के समय में प्रयोग में ले जाने वाले सिक्के और नोट यहां देखने को मिल रहे हैं. इस मुद्रा प्रदर्शनी में देश के कोने—कोने से सिक्कों का संग्रह करने वाले और खरीदने व बेचने वाले लोगों का बाजार लगा हुआ है. इस प्रदर्शनी में आपको मुगल, ब्रिटिश, चंद्रगुप्त मौर्य, अकबर, शाहजहां, शेरशाह सूरी, नूरजहां व अन्य राजा महाराजाओं के समय की मु्द्रा देखने को मिल रही है.

बेंगुलरु के आर्ची मारू भी इस प्रदर्शनी में आए हैं और उन्होंने यहां अपनी स्टॉल लगाई है. उनका दावा है कि उनके पास 2600 साल पुराना एक सिक्का है जिसे वह भारत का पहला सिक्का बता रहे हैं और इसका नाम शतनाम है. यह सक्किा चांदी की धातु से बना हुआ है. उन्होंने बताया कि उनके परिवार की तीन पीढियों से पुराने सिक्कों को संग्रह करने और उन्हें खरीदने व बेचने का काम होता है. यह सिक्का उन्हें गंधार जो कि वर्तमान में अफगानिस्तान में है, वहां से मिला है. इसके अलावा उनके पास समुद्रगुप्त मौर्य द्वारा 335 से 380 बीसी के बीच अश्वमेध यज्ञ के दौरान जारी किया गया सिक्का भी मौजूद है. इसके ऊपर घोड़े का निशान बना हुआ है.
नागपुर के अभिनाश रामहिके भी यहां आए हैं. उन्होंने बताया कि उनके पास सोनोमन द्वीप के एक किलो चांदी का सिक्का है जो वो यहां लेकर आए हैं. इसकी कीमत एक लाख 40 हजार रुपये है. बीकानेर के किशन कागज के सिक्के लाए हैं. 1943 में देश में मेटल की कमी के कारण कागज के सिक्के चले थे. कागज के सिक्कों की प्रदर्शनी लगाई है.