आगरालीक्स…. आगरा में एक अलग की तरह की समस्या बढ रही है, गर्भ अब गर्भाशय की जगह टयूब में ठहर रहा है, इसके इलाज पर आगरा ऑब्स एंड गायनिक सोसायटी (एओजीएस) ने कार्यशाला आयोजित की।
शनिवार को होटल क्रिस्टल सरोवर इन में आगरा ऑब्स एंड गायनिक सोसायटी (एओजीएस) की कार्यशाला में डॉ. सास्वती सान्याल, कोलकाता ने कहा कि एक्टोपिक प्रिग्नेंसी का गर्भधारण के बाद अल्ट्रासाउंड न होने से पता नहीं चलता है। इससे भ्रूण का आकार बढ़ने से नले फट सकते हैं। इस तरह के केस में पहले दवाएं और उसके बाद ऑपरेशन से इलाज किया जाता है। ऑपरेशन में नले खराब न हों, इसका ध्यान रखना चाहिए। डॉ. सरोज सिंह, प्राचार्य एसएन मेडिकल कॉलेज ने कहा कि गर्भस्थ शिशु की अनुवांशिक बीमारियों का अल्ट्रासाउंड सहित अन्य जांच से पता लगाया जा सकता है। इस तरह के केस में गर्भपात का विकल्प रहता है। डॉ. सोनिया नायक, मैक्स हॉस्पिटल, दिल्ली ने गर्भावस्था के पहले तीन महीने में अल्ट्रासाउंड सहित अन्य जांचों की उपयोगिता की जानकारी दी। इस दौरान एओजीएस की अध्यक्ष डॉ. सुधा बंसल, सचिव डॉ. वंदना सिंघल, डॉ. वरुण सरकार, डॉ. संध्या अग्रवाल आदि मौजूद रहे।