आगरालीक्स…हर बुखार में एंटीबायेाटिक की आवश्यकता नहीं होती. आईएपी आगरा ने ने अनावश्यक महंगी एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल से बचने को किया जागरूक…
इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स द्वारा पूरे भारतवर्ष में राष्ट्रीय नवजात शिशु सप्ताह मनाया गया। इस वर्ष IAP ने देश में एंटीबायोटिक्स के प्रति बैक्टीरिया में बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता के प्रति जागरूकता अभियान चलाया गया। भारत में एंटीबायोटिक्स के विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता चिंताजनक स्तर तक बढ़ चुकी है जहां सामान्य एंटीबायोटिक्स तो छोड़िए, नई नई एंटीबायोटिक्स का प्रभाव भी खत्म होता जा रहा है। इससे मरीजों का जीवन खतरे में पड़ता जा रहा है।
इन्फेक्शन से बचाव के तरीके बताए
IAP AGRA के सचिव डॉ योगेश दीक्षित ने बताया कि इसी क्रम में IAP Agra द्वारा भी आगरा के कई हॉस्पिटल्स में नर्सिंग स्टाफ और मरीजों के तीमारदारों को इसके बारे में जानकारी दी कि मरीज के पास अनावश्यक भीड़ न लगाने और बार बार साबुन से हाथ धोने और मास्क के प्रयोग से मरीजों को होने वाले इन्फेक्शन से बचाया जा सकता है और इस तरह मरीजों को एंटीबायोटिक नहीं देनी पड़ेगी। इस तरह अनावश्यक मंहगी एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से बच कर एंटीबायोटिक्स के खिलाफ बैक्टीरियों में प्रतिरोधक क्षमता को विकसित होने से रोका जा सकता है।
हर बुखार में एंटीबायेाटिक की आवश्यकता नहीं होती
IAP AGRA द्वारा आयोजित एक गोष्ठी में एस एन मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर माइक्रोबायोलॉजी डॉ अंकुर गोयल ने बताया कि अगले आने वाले समय के लिए कोई भी नई एंटीबायोटिक अभी रिसर्च प्रक्रिया में नहीं है, डॉक्टर्स को तब तक इन्हीं एंटीबायोटिक्स से मरीजों के जीवन की लड़ाई लड़नी है। अतः एंटीबायोटिक्स के विरुद्ध बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता को रोकने के प्रयास डॉक्टर्स और आम जनता को सामूहिक रूप से करने होंगे। डॉ गोयल ने बताया कि हर बुखार में एंटीबायोटिक की आवश्यकता नहीं होती है, एंटीबायोटिक बुखार उतारने की दवा नहीं है, केवल एंटीबायोटिक ही हर बुखार का इलाज नहीं। अतः मरीज और उनके तीमारदार एंटीबायोटिक लिखने के लिए डॉक्टर पर दवाब न बनाएं और डॉक्टर भी इस दवाब में न आएं और आवश्यकता अनुसार ही एंटीबायोटिक्स लिखें। एंटीबॉयोटिक चुनने में कल्चर और सेंसिटिविटी सबसे उचित प्रक्रिया है।
मास्क का भी इस्तेमाल महत्वपूर्ण
साधारण साबुन से हाथ धोने की प्रक्रिया और मास्क का इस्तेमाल भी एंटीबायोटिक के विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने में काफी कारगर है। गोष्ठी में डॉ राकेश भाटिया, डॉ अरुण जैन, डॉ राजेश गुप्ता , डॉ प्रदीप चावला, डॉ विशाल गुप्ता, डॉ अशोक शर्मा सहित करीब 40 बालरोग विशेषज्ञों ने भाग लिया।