आगरालीक्स…आगरा के उजाला सिग्नस रेनबो अस्पताल में हृदय नस की जटिल ब्लॉकेज खोल बचाई मरीज की जान. डॉ. विनीश जैन ने ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी थेरेपी से सफलतापूर्वक किया ऑपरेशन
हार्ट के मरीजों के लिए एक अच्छी खबर है। अब आपको दिल्ली, जयपुर या मुंबई जाने की जरूरत नहीं है। अगर आपकी हृदय की नसों में जटिल रुकावट आ गई है और खुल नहीं रही है तो ऐसे में बायपास सर्जरी का उपाय बचता है। लेकिन अब ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी थेरेपी से इसका इलाज उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल में उपलब्ध है। इस थेरेपी से ब्लॉकेज नसों को खोलकर स्टेंट डाला जाता है, ऐसा करने से कुछ केसों में बायपास सर्जरी से बचा जा सकता है।
प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट डाॅक्टर विनीश जैन ने बताया कि ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी थेरेपी एक प्रकार की चिकित्सा प्रक्रिया है जो हृदय की नसों में जटिल ब्लॉकेज को खोलने में मदद करती है। यह विशेष रूप से उन मरीजों के लिए उपयोगी है जिनकी हृदय की नसों में जटिल कैल्सिफिक ब्लॉकेज होती है। आगरा मंडल में हाल ही में पहली बार एक मरीज़ की ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी थेरेपी की गई। यह मरीज बार-बार दर्द से परेशान था। उसने कार्डियोलाॅजिस्ट डाॅक्टर विनीश जैन से संपर्क किया। मरीज की एंजियोग्राफी की गई तो नस में जटिल ब्लाॅकेज मिला जो बिना बायपास सर्जरी के संभव नहीं था। डाॅक्टर जैन ने बिना बायपास सर्जरी के ही हृदय की नस को अत्याधुनिक तकनीक ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी थेरेपी से खोल दिया। नस 90 प्रतिशत ब्लाॅक थी। इस तकनीक से नस में जमा कैल्शियम निकाला गया।
डाॅक्टर विनीश जैन के मुताबिक, इस तकनीक से हृदय की नसों में जमा कैल्शियम को हटाया जाता है। यह विशेष मशीन 80 हजार से एक लाख 20 हजार रोटेशन गति पर नसों की सफाई करती है। इस थेरेपी से विभिन्न आकारों की हृदय की नसों में कठिन और लंबी रुकावट आसानी से खुल जाती है। नसों का लुमेन आकार और प्रवाह बढ़ जाता है। यही नहीं स्टेंटिंग में अक्सर असफल मामलों में इस तकनीक के जरिये सफलतापूर्वक स्टेंट डाला जा सकता है।

उन्होंने बताया कि अत्याधुनिक विधि से जल्दी रिकवरी हो जाती है। ऐसे केसों में ज्यादातर बाइपास सर्जरी का सुझाव दिया जाता है। यह तकनीक कई मामलों में सुरक्षित है। आपको बता दें यह तकनीक देश के चुनिंदा शहरों में ही उपलब्ध है और कुछ डाॅक्टर ही इसका उपयोग करते हैं जिनमें प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट डाॅक्टर विनीश जैन शामिल हैं। उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल को छोड़कर आगरा मंडल के किसी भी अस्पताल में इस अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग नहीं किया जा रहा है।
