आगरालीक्स…आगरा के उजाला सिग्नस रेनबो अस्पताल में 870 ग्राम के नवजात की बचाई जान. साढ़े छह माह की गर्भवती महिला का बीपी अधिक होने पर तत्काल किया आपरेशन…..डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा की टीम का कमाल
चिकित्सा जगत में एक और मिसाल पेश करते हुए उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने असंभव को संभव कर दिखाया। मात्र 870 ग्राम वजन के एक अल्पवजनी नवजात शिशु को नई जिंदगी दी गई, जो जन्म के समय बेहद नाज़ुक हालत में था। बच्चे का शरीर पानी की कमी से सूख चुका था और ग्रोथ भी सामान्य से काफी कम थी। उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल के एमडी एवं प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नरेंद्र मल्होत्रा ने बताया कि मां साढ़े छह महीने की गर्भवती थी और बीपी अत्यधिक बढ़ा हुआ था। दवाओं के बावजूद नियंत्रण में न आने पर उन्हें फिट्स (झटकों) का खतरा था, जो मां और बच्चे दोनों के लिए जानलेवा हो सकता था। ऐसे में डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया।वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मनप्रीत शर्मा ने बताया कि ऑपरेशन कर सफलतापूर्वक शिशु को जन्म दिलाया। जन्म के बाद बच्चे को तुरंत एनआईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। जांच में सामने आया कि उसके फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं थे। विशेषज्ञों ने समय पर आवश्यक इंजेक्शन और न्यूरो प्रोटेक्शन ट्रीटमेंट देकर बच्चे की स्थिति को स्थिर किया। डॉक्टर आकांक्षा अरोरा गुप्ता ने बताया कि इतने छोटे बच्चों में सुनने और देखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और संक्रमण का भी अत्यधिक खतरा रहता है। इसके बावजूद टीम ने अपने अनुभव, तकनीक और समर्पण से यह असाधारण सफलता हासिल की।
आज जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। यह सफलता न केवल उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल की मेडिकल टीम की कुशलता का प्रमाण है, बल्कि यह उम्मीद की एक नई किरण भी है कि समय पर सही इलाज और समर्पित प्रयासों से असंभव भी संभव किया जा सकता है।