आगरालीक्स…स्कूलों की कैंटीन में समोसे—कचौड़ी के साथ बिकते हैं जंक फूड. अब सरकार का आदेश—स्कूलों, आफिसों में बोर्ड लगाओ—समोसे में कितना तेल और जलेबी में कितनी शक्कर..
भारत में तेजी से बढ़ते मोटापे और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने नई पहल की है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से सभी स्कूलों, मंत्रालयों, विीाागों ओ स्वायत्त संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वे समोसा, कचौड़ी, फ्रेंच फ्राइज, जलेबी और बड़ा पाव जैसे भारतीय नाश्तों में कितनी तेल और चीनी होती है, यह आयल और शुगर बोर्ड के जरिए साफ—साफ दिखाएं.स्वास्थ्य मंत्रालय चाहता है कि स्कूलों के साथ ही दफ्तरों और सार्वजनिक संस्थानों में खाने की वस्तुओं में छुपे हुए तेल और चीनी की मात्रा की जानकारी दी जाए. इसके लिए एक बोर्ड या पोस्टर लगाया जाए जो लोगों को यह जानकारी दे और उन्हें स्वस्थ् विकल्प चुनने के लिए प्रेरित करे.
ये की गई अपील
स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश के अनुसार ये बोर्ड कैफेटेरिया, लॉबी, कैंटीन, मीटिंग रूम और अन्य सार्वज्निक स्थानों पर लगाए जाएं. इसका मकसद यह है कि लोग रोजमर्रा की आदतों को सुधारें और हेल्दी खाना अपनाएं. इसके अलावा स्वास्थ्य संदेशों को लेटरहेड, लिफाफे, नोट पैड, फोल्डर आदि पर छापें जैसे 'कमल तेल, कम चीनी—सेहत के लिए अच्छी जिंदगी', 'रोज चलें कुछ कदम, सेहत रहे हरदम'..स्वास्थ्य मंत्रालय की कोशिश है कि यह रोजाना याद दिलाने का एक तरीका होगा कि लोग मोटापे से बचने के लिए सजग रहें.
बता दें कि स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तन ने 21 जून को एक पत्र लिखकर चिंता जताई थी कि भारत में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है. एनएफएचएस—5 के अनुसार, शहरी इलाकों में हर पांच में से एक व्यस्क मोटापे से ग्रसित है. वहीं बच्चों में भी मोटापा बढ़ रहा है जिसकी बड़ी वजह है गलत खानपान और कम शारीरिक गतिविधि. एक अध्ययन के अनुसार भारत में मोटे व्यस्कों की संख्या 2021 में 18 करोड़ थी जो 2050 तक बढ़कर 44.9 करोड़ हो सकती है. अगर इसे नहीं रोका गया तो भारत विश्व में मोटापे का दूसरा सबसे बड़ा बोझ उठाने वाला देश बन जाएगा.