आगरालीक्स… आगरा में मरीजों द्वारा स्वास्थ्य मंत्री सिद्वार्थ नाथ सिंह को घेर लेने पर एक डॉक्टर सस्पेंड कर दिया है। वहीं, प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों का लाइसेंस निरस्त करने के आदेश दिए गए हैं।
शुक्रवार दोपहर 1 बजे स्वास्थ्य मंत्री सिद्वार्थ नाथ सिंह जिला चिकित्सालय का निरीक्षण करने पहुंचे। ओ0पी0डी0, बाल बजविभाग, दवा वितरण कक्ष आदि विभागों के निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिये। निरीक्षण के दौरान एक महिला मरीज के चिकित्सक द्वारा बाहर से दवा मंगाने का पर्चा लिखने की शिकायत पर महिला चिकित्सक डॉ मिथलेश मौर्य को सस्पेंड कर दिया।
सर्किट हाउस में समीक्षा बैठक में डॉक्टरों द्वारा प्राइवेट प्रैक्टिस करने पर
उनके विरूद्व कार्यवाही के साथ-साथ एमसीआई के माध्यम से उनके लाइसेंस भी रद्द कराये जायेगें। उन्होंने फर्जी ब्लड बैंको के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने के साथ ही कहा कि जिन क्षेत्रों में स्वाइन फ्लू के पाजिटिव मामले आये है उन क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर व्यापक प्रचार प्रसार के साथ आवश्यकतानुसार दवा की उपलब्धता सुनिश्चित करा दी जाय।
चिकित्सकों की भर्ती के लिए होंगे इंटरव्यू
अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी के दृष्टिगत मुख्य चिकित्साधिकारियों को निर्देशित किया कि वे निर्धारित कमेटी के माध्यम से प्रक्रिया का पालन करते हुए डाक्टरों की वाॅक-इन इन्टर व्यू के तहत तैनाती करायें। उन्होंन एनएचएम के अन्तर्गत पुरानी प्रक्रिया के अनुसार खरीदी गयी गाड़ियो का भी ठीक प्रकार से जांच कराये जाने के निर्देश दिए । उन्होंने कहा कि अस्पतालों में चतुर्थ श्रेणी स्टाफ की तैनाती चयनित एजेन्सी के माध्यम से आउट सोर्सिंग द्वारा नियमानुसार किया जाय। उन्होंने विभाग द्वारा विभिन्न स्थानों पर आयोजित होने वाले स्वास्थ्य शिविरों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश देते हुए कहा कि क्षेत्रीय जन प्रतिनिधियों को भी इसकी जानकारी दे दी जाये। मुख्य चिकित्साधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि एनएचएम के निदेशक से वार्ता कर अच्छे प्राइवेट अल्ट्रा साउण्ड सेन्टर का पंजीकरण करके उसके माध्यम से भी मरीजों की चिकित्सीय जांच करा सकते है। उन्होंने अस्पतालों में मृत मरीजों हेतु शव वाहन न मिलने के शिकायतों के निस्तारण हेतु कहा कि शासन स्तर से इसके लिए प्राइवेट वाहनों का पंजीकरण करके बी0पी0एल0 परिवारों को निःशुल्क तथा अन्य के लिए सशुल्क वाहन उपलब्धता का निर्णय लिया गया है। उन्होंने इसका ठीक प्रकार से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि जो लोग मरीज के शव स्वेच्छा से स्वंय ले जाना चाहते हो तो उनसे यह लिखित में लिया जाये कि उन्हें अस्पताल की ओर से वाहन नही चाहिए ।