आगरालीक्स…आगरा में 48 घंटे बाद प्रदेश का पहला टेस्ट ट्यूब बेबी 27 साल का हो जाएगा. नाम है उत्सव…मल्होत्रा नर्सिंग एंड मैटरनिटी होम में हुआ था जन्म. जानें कैसा होता है टेस्ट ट्यूब बेबी
उत्तर प्रदेश में पहली बार 1998 में आईवीएफ तकनीक से आगरा के मल्होत्रा नर्सिंग एंड मैटरनिटी होम में टेस्ट ट्यूब बेबी उत्सव का जन्म हुआ था, जो एक अगस्त 2025 को 27 साल का हो जाएगा. डॉक्टर जयदीप मल्होत्रा (एमडी, रेनबो आईवीएफ) ने बताया कि 1997 में मल्होत्रा टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर की स्थापना की गई थी. उस समय यह प्रदेश का पहला प्राइवेट टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर था. आईवीएफ की सक्सेस इसे खास बनाती है. 1998 में हमें आईवीएफ पद्धति से पहले शिशु का जन्म कराने में सफलता मिली तो यह हमारे लिए किसी उत्सव से कम नहीं था. आगरा निवासी लाभान्वित परिवार के लिए यह सबसे बड़ी खुशी थी. लिहाजा इस पहले शिशु का नाम उत्सव रखा.वे बताती हैं कि हमने रेनबो आईवीएफ के सफर को लगातार गति दी. समय-समय पर अत्याधुनिक तकनीक से सेंटर को अपग्रेड किया. हमारे पास अत्याधुनिक आईवीएफ लैब है। उत्कृष्ट एंब्रॉलजिस्ट हैं जो सेंटर के महत्वपूर्ण अंग होते हैं. डाक्टर जयदीप ने बताया कि 2004 में नेपाल में आईवीएफ सेंटर स्थापित किया. यह नेपाल का पहला आईवीएफ सेंटर था. अब तक करीब 20 हजार आईवीएफ बेबी पैदा हो चुके हैं. इनमें नेपाल में पैदा हुए तीन हजार बेबी भी शामिल हैं. उन्होंने बताया हमारे यहां दुनियाभर से निःसंतान दंपती इलाज के लिए आते हैं. हम उनके विश्वास पर पूरा खरा उतरने का प्रयास करते हैं.
वे बताती हैं कि हमने भारत के प्रसिद्ध तीन मेडिकल कॉलेजों में आईवीएफ सेंटर स्थापित कराए हैं. उनकी हर तरह की सहायता भी कर रहे हैं. रेनबो आईवीएफ सेंटर प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी सर्वश्रेष्ठ है. अपने यहां देश-विदेश से ट्रेनी डॉक्टर और एंब्रॉलजिस्ट आते हैं, उन्हें यहां ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि वे अपने देश, राज्य या शहर में जाकर आईवीएफ पद्धति से इलाज कर सकें. इस उपलब्धि पर हाल ही में उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल में उत्सव मनाया गया. अपने माता-पिता के साथ आए आईवीएफ से जन्मे बच्चों ने सिंगिंग और डांस कर समारोह की रौनक बढ़ा दी. बच्चों को गिफ्ट और परिजन को एक-एक पौधा भेंट किया गया.जानें कैसा होता है टेस्ट ट्यूब बेबी
टेस्ट ट्यूब बेबी में महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को लैब में निशेचित किया जाता है. वैसे प्राकृतिक रूप से पति—पत्नी के संबंध बनाने पर यह प्रक्रिया होती है. इससे भ्रूण बनता है. तीन से पांच दिन तक इसे लैब में विकसित किया जाता है. इसके बाद इसे महिला के गर्भ में स्थापित कर दिया जाता है. इसके बाद भ्रूण महिला के गर्भ में ही सामान्य बच्चे की तरह विकसित होने लगता है. इसलिए टेस्ट ट्यूब बेबी और सामान्य बच्चे में किसी भी तरह का कोई अंतर नहीं होता.