आगरालीक्स…आगरा की रामलीला में धू धू कर जला रावण का पुतला (Video). आपरेशन सिंदूर को किया समर्पित.आतिशी नजारों ने नहा गया गगन
रघुवंश शिरोमणि ने रामलीला मैदान में गुरुवार को जैसे ही दशानन का वध किया, श्रीराम के गगनभेदी जयघोष गूंज उठे। आतिशी धमाकों ने श्रीराम की विजय का संदेश दसों दिशाओं में पहुंचा दिया। बैंड बाजों की धुनों ने माहौल में खुशियां बिखेर दीं। आतिशबाजी के नजारों ने विजय की प्रसन्नता को झिलमिला दिया और उसके बाद धू धू करके रावण का पुतला जल कर कुछ ही देर में राख हो गया। हर किसी का ललाट इस विजय ऊंचा हो गया। और अपने धर्म पर अभिमान हुआ।
उत्तर भारत की प्रमुख श्रीराम लीला में आज का दिन बहुत खास था। प्रवेश द्वार को विद्युत झालरों से आकर्षक ढंग से सजाया गया था। पूरा मैदान झिलमिला रहा था। सांझ होते ही हजारों, लाखों कदम रामलीला मैदान में पहुंचने लगे। राम मंच पर संक्षिप्त मंचन के बाद राम और रावण का घमासान युद्ध मैदान में होने लगा। एक रथ पर झिलमिलाते सूर्य के मुकुट को धारण किए रघुनंदन और शेषनाग का मुकुट पहने लक्ष्मण जी विराजमान थे, दूसरे पर काले कपडे़ पहने रावण और उसकी सेना थी। दोनों ओर से घमासान युद्ध हुआ। तीरों की बौछार हुई। राम की सेना जय श्रीराम और रावण की सेना दशानन के जयघोष करते हुए युद्ध कर रही थी। इस रोमांचकारी युद्ध का नजारा लाखों लोग देख रहे थे। मैदान के चक्कर लगाने के बाद यह दोनों सेनाएं मध्यवर्ती चबूतरे पर पहुंच गईं। यहां फिर से युद्ध हुआ तलवार खनकती रहीं, भाले चलते रहे और अंत में प्रभु श्रीराम ने रावण का वध कर दिया।
रावण का वध होते ही आतिशी धमाके गूंज उठे। बैंड बाजों ने खुशी की धुनें निकाली और हर ओर जय श्री राम-जयश्रीराम के उद् घोष गूंज उठे। हर किसी को अपने धर्म और प्रभु श्रीराम पर गर्व हो उठा था। वहीं मंच से व्यास जी डा.पंकज दर्पण अग्रवाल ने गोस्वामी तुलसीदास जी की चौपाई का गायन किया-
बरषहिं सुमन देव मुनि बृंदा।
जय कृपाल जय जयति मुकुंदा।।
अर्थात देवता और मुनियों के समूह फूल बरसाते हैं और कहते हैं- कृपालु की जय हो, मुकुन्द की जय हो, जय हो।
युद्ध का संचालन आनंद मंगल, मोहित गोयल, मनोज होजरी, लखन द्वारा किया गया। आतिशबाजी का संचालन मुकेश जौहरी, प्रकाशचंद, अंजुल बंसल, सौरभ गौतम। पुतले का संचालन प्रवीण स्वरूप एवं मुकेश जौहरी द्वारा किया गया। इस दौरान मंच पर प्रभु श्रीराम की आरती करने वालों में रामलीला कमेटी के अध्यक्ष विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, महामंत्री राजीव अग्रवाल, टी एन अग्रवाल, भगवान दास बंसल, विजय प्रकाश गोयल, प्रवीन स्वरूप, मुकेश श्रृंगार, मनोज पोली, विष्णु दयाल बंसल, ताराचंद, विनोद जौहरी, संजय तिवारी, प्रवीन गर्ग, महेश चन्द, दिलीप कुमार अग्रवाल, मनोज कुमार अग्रवाल, मनीष शर्मा, शैलेंद्र अग्रवाल, निक्की जौहरी, राहुल गौतम प्रमुख थे।
आतिशी नजारों ने नहा गया गगन
रावण वध के बाद आतिशबाजी का भव्य मुकाबला हुआ। मैदान में थे अलीगढ़ के मोहन और मथुरा के अजय। दोनों ने ही एक के बाद एक आतिशबाजी के नजारे दिखाए। कभी आसमान लाल हो जाता तो कभी प्रकाश की किरणें छा जातीं। कभी आसमान में एक साथ धमाके होते तो कभी आसमान से मोती झरने लगते। आतिशी झरनों ने भी सभी का दिल जीत लिया। आतिशबाजी से बने अनेक संदेश भी दिये गए। अन्य कई आइटम दिखा कर दर्शकों को हतप्रभ कर दिया। इस मुकाबले के निर्णायक मंडल मध्यवर्ती चबूतरे पर विराजमान थे।