आगरालीक्स…आगरा में बसा ब्रज…श्रीकृष्ण लीला महोत्सव के छठवें दिन माखन-चोरी एवं कालियादमन की अद्भुत लीला. बाल-रूप की मस्ती से लेकर यमुना तट की वीरता तक, भक्त भाव-विभोर
श्रीकृष्ण लीला महोत्सव समिति द्वारा बल्केश्वर स्थित गौशाला प्रांगण में आयोजित श्री कृष्ण लीला में गुरुवार को छठवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की माखन-चोरी एवं कालिया नाग मर्दन (कालियादह लीला) का भव्य मंचन किया गया। पूरा वातावरण ब्रज की माखन-मटकी, ग्वालिनों की तकरार और यमुना तट की दिव्य महिमा से सराबोर नजर आया। मंचन की शुरुआत भक्तिमय चौपाई से हुई, “प्रथम करी हरि माखन चोरी, ग्वालिन मन इच्छा करि पूरन।” बाल-कृष्ण की माखन-चोरी की अठखेलियों ने दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान और हृदय में प्रेम भर दिया। ग्वालिनों का नाराज़ होना, शरारती नंदलाल का बचपना और अंत में सभी का प्रेमभाव, इन दृश्यों ने समूचे पंडाल को साक्षात गोकुल बना दिया।
छोटे-छोटे बच्चों द्वारा श्रीकृष्ण और ग्वाल-बाला का रूप धारण कर माखन की मटकी फोड़ते हुए प्रस्तुति दर्शकों को आनंदित कर गई। इसके बाद कालियादह लीला का सजीव मंचन किया गया। यमुना में गिरी गेंद लाने गए कृष्ण ने देखा कि कालिया नाग ने यमुना को विषाक्त बना दिया है। कृष्ण ने अदम्य साहस के साथ कालिया के फनों पर नृत्य कर उसे पराजित किया और ब्रजवासियों को भय से मुक्ति दिलाई। कथा में जैत गाँव की मान्यता का उल्लेख भी हुआ, जहाँ कालिया ने पीछे देखा और श्राप अनुसार पत्थर हो गया। वर्तमान में वहाँ स्थित कालिया नाग मंदिर और नाग पंचमी पर लगने वाले लक्खी मेले का भावपूर्ण वर्णन किया गया। दर्शक “कन्हैया लाल की जय”, “कालियामर्दन लाला की जय” के जयगान करते रहे। अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने कहा कि कृष्ण बाल-रूप में आनंद के स्वरूप हैं और कालिया-वध में धर्म-स्थापक एवं भय-नाशक। आज की लीला ने दोनों पक्षों का अद्भुत दर्शन कराया।
लीला में गूंजेगी मीरा की भक्ति
अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने बताया कि सातवें दिन शुक्रवार को लीला महोत्सव में पहली बार संत शिरोमणि भक्त शिरोमणि मीरा बाई के चरित्र प्रसंग का भव्य मंचन किया जाएगा। इस अवसर पर मीरा और श्रीकृष्ण के अनन्य प्रेम, अद्वितीय समर्पण, भक्ति-रस और त्याग को जीवंत किया जाएगा।
मीरा के अमर भजनों “पायो जी मैंने राम रतन धन पायो”,
“मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोय” की मधुर ध्वनियों के साथ भक्तों को अलौकिक आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति होगी। उन्होंने ब्रज-रस, प्रेम-रस और भक्ति-रस से ओत-प्रोत इस अविस्मरणीय प्रसंग को देखने हेतु सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होने की विनम्र अपील की।