आगरालीक्स…वृद्धावस्था को दूर रखना है तो तनाव, नशा और मोटेपे को दूर रखें. जितना हो सके खुद को व्यस्त रखें..आगरा में पद्मश्री डॉ. डीके हाजरा ने दिए वृद्धावस्था को खुशहाल बनाने के टिप्स
पद्मश्री डॉ. डीके हाजरा ने कहा कि वृद्धावस्था को खुशहाल बनाए रखने के लिए रिटायरमेंट से पहले प्लानिंग करना बहुत जरूरी है। आप रिटायर हो चुके हैं, इसलिए खाली न बैठे। खाली बैठने से एजिंग बढती है। खुद को वयस्त रखें। सामाजिक व पारीवारिक कार्यों ने भाग लें। तनाव, तम्बाकू और मोटापा भी एजिंग को बढ़ाता है। खुश और तनाव मुक्त रहने के लिए बच्चों को पढ़ाना, ध्यान, संगीत को अपनाएं। 7-8 घंटे की पूरी नींद लें।मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए विटामिन एफ लीजिए
पैसे से ज्यादा विटामिन एफ यानि फ्रेंड्स को महत्व देंगे को मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगे। एजिंग ग्रेसफुली विषय पर बोलते हुए डॉ. वीएन कौशल ने बताया कि विश्व में बुजुर्गं की संख्या बढ़ने के साथ उनसे जुड़ी समस्याएं और बीमारियां भी बढ़ रही हैं। बुढ़ापा दूर भगाने और बढ़ती उम्र में स्वस्थ रहने के लिए उन्होंने कुछ मुख्य टिप्स दिएः
अपने मस्तिष्ट और हृदय को स्वस्थ रखने के लिए कम से कम रधा घंटा अवश्य टहलें।
दिनचर्या को नियमित रखें, सोने और भोजन करने का समय निश्चित रखें। खाना क्या खाते हैं से ज्यादा किस समय खाते हैं यह भी महत्वपूर्ण है।
अपने वजन के अनुसार खाने में प्रोटीन का अनुपात 1- 1.2 रखें।
गेंहू के बजाय मोटे अनाज का प्रयोग करें। डायबिटीज, कोलेस्ट्रोल और बीपी को टंड्रोल रखने के लिए खाने से पहले सलाद लें। सीजनल फल व सब्जियां खाएं।
एक-दो माह के न्तराल पर कहीं घूमने अवश्य जाएं। जीवन को सुखी और सफल बनाने के लिए अनुशासन में रहिए।
वृद्धावस्था को खुशहाल जीवन भर स्वस्थ रहना तो जिन्दगी और प्रकृति का मजा लीजिए। यह कहना था कार्यशाला के ब्रांड एम्बेसेडर डॉ. अनुल अग्रवाल का। कोशी के 71 वर्षीय डॉ. अनिल ने अपनी दिनचर्या बताते हुए कहा कि सुबह 3 बजे से उनका दिन योग के साथ प्रारम्भ होता है। इसके बाद 3 घंटे स्ट्रेचिंग व्यायाम और लगभग 12 किमी की दौड़। 50 बेड का हॉस्पीटल चलाने वाले डॉ. अनिल शर्मा 5.30 बजे के बाद ओपीडी में नजर नहीं आते रात ठीक 8 बजे बिस्तर पर होते हैं। उन्होंने कहा कि लोग पैसा कमाने के चक्कर में जिन्दगी और प्रकृति को इंजॉय करना भूल जाते हैं, जो वृद्धावस्था में बीमारी या समस्या का कारण बनती है।
2050 में दोगुने वृद्धों को सम्भालने के लिए तैयार रहे भारत
यूके के डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि विश्व में वृद्धों की संख्या तेजी से बढ़ रही। भाररत में 2050 में भारत में वृद्धों की संख्या वर्तमान से दोगुनी हो जाएगी। जो सुनामी जैसी स्थिति होगी। भारत को इस परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। डॉक्टरों की नई पीढ़ी को वृद्धावस्था में इलाज के लिए क्लीनिकल तरीकों पर ज्यादा जोर देना चाहिए। मरीज की जांचें क्लीनिकल फाइंडिंग के बाद कराएं। मरीज गिर रहा है उसे दवा देने से पहले यह जानना जरूरी है कि उसका कारण बीपी है या पार्किन्सन्स या कुछ और। विश्व की सभी जीरीएटिक सोसायटी में आपस में सामन्जस्य का होना बहुत जरूरी है। क्योंकि वृद्धावस्था में होने वाली बीमारियां सिर्फ एक देश की नहीं बल्कि पूरे विश्व की समस्या है।