आगरालीक्स…आगरा के गुरुद्वारों में मनाया होला महल्ला. दशम पातशाही श्री गुरु गोविंद सिंह ने की थी शुरुआत. कीर्तन समागम ने बांधा समां
सिख धर्म में होली के पर्व को होला महल्ला के रूप में मनाया जाता है। होला महल्ला की शुरुआत दशम पात शाही श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने की थी। आगरा में इस अवसर पर गुरुद्वारा साहिबजादा बाबा अजीत सिंह जी,अजीत नगर और गुरुद्वारा हाथी घाट पर कीर्तन समागम आयोजित किए गए। सुबह का दीवान गुरुद्वारा साहिबजादा बाबा अजीत सिंह जी, अजीत नगर में आयोजित किया गया ।कीर्तन समागम की शुरुआत गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रकाश के साथ हुई । जिसके बाद भाई जसपाल सिंह जी अखंड कीर्तनी जत्थे की ओर से आसा दी वार का कीर्तन किया गया।
उनके बाद गुरुद्वारे के हजूरी रागी भाई करनैल सिंह और बीबी परमिंदर कौर ने कीर्तन की हाजिरी भरी।अमृतसर से आए भाई डिंपल सिंह जी ने गुरमत विचार रखें ।कीर्तन समागम की मुख्य हाजिरी रागी भाई मनकरण सिंह फरीदाबाद वालों ने भरी और अपनी इलाही वाणी से कीर्तन कर संगत को निहाल किया। उनके द्वारा शबद "लाल रंग तीसको लगा जिसके वड़भगा " का गायन किया गया संगत के जयकारे की आवाज से गुरुद्वारा गूंज उठा ।गुरुद्वारा अजीत नगर के सचिव कुलविंदर सिंह अरोड़ा ने बताया कि आगरा में पिछले कई दशकों से गुरुद्वारा अजीत नगर में होला महल्ला के अवसर पर कीर्तन समागम की परंपरा चली आ रही है।
इस वर्ष भी कीर्तन समागम में संगत ने बढ़ चढ़ के अपनी हाजिरी भरी। कीर्तन समागम मैं फतेहपुर सीकरी सांसद राजकुमार चहर परिवार की ओर से विशेष सहयोग दिया गया जिसके चलते प्रधान सरदार सी.पी कोचर जी ने उनके पुत्र परमवीर चाहर जी को सिरोंपा से सम्मानित किया ।इस कार्यक्रम को सफल बने के लिए सरदार कुलदीप सिंह कांड्रा और जसबीर सिंह जस्सी को सरदार सरबजीत सिंह कोहली द्वारा सारोपा दिया गया। कार्यक्रम का संचालन भाई हरनेक सिंह ने किया ।समाप्ति के बाद गुरु का अटूट लंगर वारताया गया ।इस अवसर पर उपप्रधान बृजेंद्र सिंह ,जसपाल कोचर , राणा रणजीत सिंह, दलजीत सिंह, सुरेंद्र पाल सिंह,रवींद्र सिंह,इकबाल सिंह, कुलविंदर सिंह,आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे ।
शाम का दीवान गुरुद्वारा हाथी घाट यमुना किनारा रोड पर आयोजित किया गया। कीर्तन समागम का आयोजन गुरुद्वारा माईथान की ओर से किया गया था ।कीर्तन समागम की शुरुआत रहिरास साहिब जी के पाठ के साथ हुई। इस अवसर पर सुखमनी सेवा सभा के वीर महेंद्र पाल सिंह की ओर से गुरबाणी की अमृत वर्षा की गई। गुरुद्वारा माईथान के प्रधान कवलदीप सिंह और ग्रंथी ज्ञानी कुलविंदर सिंह ने बताया कि औरंगज़ेब के शासनकाल में आम लोगों के घोड़े पर बैठने शस्त्र चलाने व सिर पर कलगी लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। गुरु गोविंद सिंह जी ने औरंगजेब को चुनौती देते हुए उसे समय सबसे महंगी अरबी घोड़े मंगाकर ना केवल उन पर सवारी की बल्कि अपने सिर पर कल की भी सजाई साथ ही होला महल्ला का आयोजन कर युद्ध कला का शानदार प्रदर्शन भी करवाया। इस आयोजन का उद्देश्य युद्ध कला में अपने सिखों को पारंगत करते हुए युद्ध की रिहर्सल करना होता था ।तभी से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। कीर्तन समागम की समाप्ति के बाद हेड ग्रंथी ज्ञानी कुलविंदर सिंह ने स सीवीरबत के भले की अरदास की।अंत में हुकुम नामा हुआ और गुरु का अटूट लंगर वारताया गया ।इस अवसर पर वीरेंद्र सिंह वीरे, प्रवीण अरोड़ा ,रौनक वाधवा, श्याम भोजवानी रक्षपाल सिंह आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।