आगरालीक्स…आगरा में ठाकुर जी के बगीचा स्वरूप में हुए दर्शन, यमुना किनारा स्थित श्री मथुराधीश मंदिर में छायी हर तरफ हरियाली…
पुरुषोत्तम मास उत्सव श्रृंखला के तहत यमुना किनारा स्थित श्री मथुराधीश मंदिर में ठाकुर श्री मथुराधीशजी महाराज भक्तों को मनोहारी बगीचा स्वरूप में दर्शन दिए। मंदिर परिसर को फूलों, हरियाली, वृक्षों और प्राकृतिक सजावट से भव्य बगीचे का रूप दिया गया। भक्तों ने ठाकुर जी के दर्शन किए और श्रीहरि के जयकारों से मंदिर गुंजायमान हो उठा। यमुना सेवक बृज खंडेलवाल जी व मंदिर के महन्त नन्दन श्रोत्रिय ने बताया कि पुष्टिमार्ग में “बगीचा उत्सव” अत्यंत मधुर, भावपूर्ण और प्रकृति-रस क साथ उत्सव मनाया गया। यह उत्सव ठाकुरजी की बाल-लीलाओं, निकुंज-विहार और ब्रज की प्राकृतिक छटा का प्रतीक है। वल्लभ सम्प्रदाय की सेवा-परंपरा में ठाकुरजी को बालक मानकर उनकी रुचि और आनंद के अनुरूप सेवा-सज्जा की जाती है। इसी भाव से उन्हें बगीचे की हरियाली, पुष्पों और वन-विहार के वातावरण में विराजित किया। उत्सव में मोर का विशेष महत्व होता है। ठाकुरजी को मोर-मुकुट, मोर-पंखों से सुसज्जित आभूषण और प्रकृति-प्रधान शृंगार धारण कराया गया। यह उत्सव ब्रजभूमि के वन, कुंज, यमुना तट और श्रीकृष्ण की मधुर लीलाओं की स्मृति को जीवंत कर देता है। बगीचा उत्सव केवल सजावट का आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, प्रेम और आनंद का आध्यात्मिक अनुभव है। भक्तों को ऐसा भावपूर्ण दर्शन होता है, मानो ठाकुरजी स्वयं ब्रज के उपवनों में विहार कर रहे हों। फूलों की सुगंध, हरियाली की शीतलता और मधुर भक्ति-भाव मिलकर वातावरण को दिव्य बना देते हैं। पुष्टिमार्ग की यही विशेषता है कि यहाँ हर उत्सव में ठाकुरजी को बाल-सुलभ आनंद प्रदान करने का प्रयास किया जाता है। बगीचा उत्सव भी उसी वात्सल्य, माधुर्य और प्रेम-भक्ति की सुंदर अभिव्यक्ति है। संध्या आरती यमुना आरती महन्त जुगल श्रोत्रिय ने की। इस अवसर पर मुख्य रूप से गिरिराज किशोर सादानी, रतन सादानी, रोहित सादानी. आव्या श्रोत्रिय, ओजस्वी भारद्वाज, मनीष भारद्वाज, राघव, अथर्व, राघव, अभिनव, अपाला, राकेश शर्मा आदि उपस्थित थे।