आगरालीक्स…Video…अहमत्व और ममत्व ही दुख का सबसे बडा कारण. आगरा के बल्केश्वर पार्क में इंद्रेश जी की कथा में दूसरे दिन उमड़ा जनसैलाब.
विख्यात कथा व्यास आचार्य इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि जीवन में दुख के दो ही कारण हैं, अहमत्व और ममत्व। इन दोनों पर जो नियंत्रण कर लेगा, उससे बड़ा सुखी कोई नहीं हो सकता। इसलिए इन दोनों अवगुणों पर नियंत्रण करना चाहिए। बल्केश्वर महादेव भक्त मंडल द्वारा बल्केश्वर पार्क में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का सोमवार को दूसरा दिन था। बल्केश्वर महादेव के सानिध्य में, यमुना के तट पर हो रही इस कथा का इंद्रेश उपाध्याय ने महत्व बताया और सती चरित्र, ध्रुव कथा,कर्दम देवाहुति प्रसंग पर चर्चा की। आकर्षक सजी व्यास पीठ पर जैसे ही इंद्रेश उपाध्याय आये, सभी ने उनका जय़घोष करके स्वागत किया। व्यास पीठ पर प्रथम स्वागत बल्केश्वर मंदिर के महंत कपिल नागर ने किया। उसके बाद उन्होंने जैसे ही ‘भज मन प्यारे, राधे गोविंदम’ गाया, पंडाल में बैठे हजारों श्रद्धालुओं ने उनके सुर में सुर मिलाये तो माहौल और अधिक भक्तिमय हो गया।
इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि अहमत्व का अर्थ है, अहम यानि घमंड करना, मैं अधिकारी हूं, शहर का सेठ हूं, बहुत बडा आदमी हूं। लेकिन यह सब एक पल में ढेर हो जाते हैं। अपना शरीर भी अपना नहीं होता। जिस शरीर को जिंदगी भर संभाला, संवारा, भोजन कराया, उस देह से बात करो, अब तू पतला होना शुरू हो जा। एक भी बाल सफेद मत कर, झुर्रियां नहीं आना चाहिए, क्या यह शरीर हमारा कहना मानता है क्या। जब हमारा शरीर ही हमारे नियंत्रण में नहीं, तो उस पर अभिमान क्यों। अभिमान छोड़ दोगे तो तुमसे अधिक कोई सुखी नहीं होगा।
इसी प्रकार उन्होंने कहा कि अपने लोगों से ममता भी दुख का दूसरा कारण है। जिन्हें आप अपना कहते हो, वह शरीर से आत्मा से निकलते ही दूर रह जाते हैं। पत्नी भी दरवाजे तक रह जाती है। केवल भगवत नाम और अच्छे कर्म अंत में साथ जाते हैं।
मौन का महत्व बताते हुए इंद्रेश जी ने कहा कि कथा को मौन रह कर सुनना चाहिए। आपस में बात करोगे तो मन भटकेगा। मौन रखने से मनन की शक्ति बढ़ती है। चिंतन नहीं हो पाता। नरसी मेहता के प्रसंग को भी बड़े ही रोचकता के साथ सुनाया। अमेरिका के केनिया में उनका यह प्रसंग मैंने सुनाया था। वहां बहुत ही पसंद किया गया।
उनके इस संकीर्तन पर भी झूम उठे-
हरि नाम से तेरा काम बनेगा,
हरि नाम ही तेरे साथ चलेगा।
हरि नाम लेने वाला, हरिनाम गाने वाला
हरि का है प्यारा, हरि का भजन करो, हरि है तुम्हारा।