आगरालीक्स …मुगल शहंशाह शाहजहां के उर्स पर सर्वधर्म सद्भाव की प्रतीक 1111 मीटर की हिंदुस्तानी सतरंगी चादर पेश की। रविवार को उर्स के तीसरे दिन मोहब्बत की नगरी से दुनिया को प्रेम और सदभावना का संदेश दिया गया।
ताजमहल में शहंशाह शाहजहां के तीन दिवसीय उर्स के अंतिम दिन रविवार को खुद्दाम ए रोजा कमेटी द्वारा सर्वधर्म सद्भाव की प्रतीक 1111 मीटर की हिंदुस्तानी सतरंगी चादर पेश की। दोपहर तीन बजे दक्षिणी गेट ताजगंज स्थित हनुमान मंदिर से ताजमहल मुख्य गुंबद चादर ले जाई गई, यहां से सदभावना का संदेश दिया।
मुमताज और शाहजहां की असली कब्र
आपने ताजमहल में मोहब्बत की निशानी मुमताज और शाहजहां की असली कब्र देखी हैं, नहीं देखी तो आज देख सकते हैं। इसके लिए ताजमहल की टिकट भी नहीं लगेगी। ताजमहल में आज से मुगल बादशाह शाहजहां तीन दिवसीय उर्स शुरू हो रहा है। पांच मई तक चलने वाले उर्स में शाहजहां और मुमताज की असली कब्र का भी रास्ता खुलेगा। ताज महल में पर्यटकों को जो कब्रें दिखती हैं, वो असली नहीं हैं। इस कब्र के ठीक नीचे अंडरग्राउंड कमरे में असली कब्र बनी हैं। यहां पर सिर्फ पुरातत्व कर्मचारियों और अधिकारियों को जाने की इजाजत है। इसे उर्स पर ही खोला जाता है।
13 अप्रैल से शुरू हुआ उर्स
आगरा में शुक्रवार को भी ताजमहल खुला है और नीचे तहखाने में स्थित मुगल शहंशाह शाहजहां और मुमताज बेगम की असली कब्र में भी प्रवेश दिया जा रहा है। शहंशाह शाहजहां का 363 वां उर्स मनाने के लिए स्थानीय लोगों के साथ देश विदेश से लोग आए हैं। पर्यटकों की संख्या भी काफी है।
शुक्रवार को ताजमहल बंद रहता है। आज से ही शहंशाह शाहजहाँ का तीन दिवसीय 363वां उर्स शुरू हो रहा है। यहां गुस्ल की रस्म के साथ तहखाने में स्थित रॉयल कपल शहंशाह शाहजहां और मुमताज बेगम की असली कब्रों को खोला गया, इसके साथ ही फूलों की चादर चढाई गई और देश दुनिया के लिए दुआ मांगी गई। इसके साथ ही शुक्रवार दोपहर दो बजे से पर्यटकों को भी असली कब्र का दीदार करने के लिए प्रवेश दिया गया।
ढोल और कब्बाली
शहंशाह शाहजहां का 363 वे उर्स पर ताजमहल में ढोल और कब्बाली का आयोजन किया गया है, रॉयल गेट पर कब्बाली के साथ ही ताजमहल में उर्स मनाया जा रहा है। वहीं, शनिवार को उर्स के दूसरे दिन संदल और तीसने दिन रविवार को चारदपोशी की रस्म होगी।