आगरालीक्स… आगरा में अनूठी प्रदर्शनी लगाई गई, इसमें कहा गया कि मानवाधिकार शिक्षा वो शक्ति है जो हमसे महारी पहचान कराती है। हर व्यक्ति को यह अधिकार है कि उसे खुद से सम्बंधित मानवाधिकारों का जानकारी हो। मानवाधिकार उन मूल्यों, प्रवृत्तियों व व्यवहार के विकास को बढ़ावा देते हैं, जो जनतंत्र एवं कानून आधारित शासन की प्रक्रियाओं का आरम्भ करते हैं। कुछ यही संदेश देते नजर आ रहे थे सूरसदन में आयोजित प्रदर्शनी में लगे 25 पैनल और कहानियां जिनका संग्रह विश्व भर से किया गया।
भारत सोका गक्काई इंटरनेशनल संस्था द्वारा सूरसदन में जीवन का परिवर्तनः मानव अधिकार शिक्षा की शक्ति विषय पर आयोजित प्रदर्शनी का शुभारम्भ दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के समाज शास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. पूर्णिमा जैन ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि अपने प्रति मानवाधिकारों की जानकारी के साथ यह भी आवश्यक है कि हमारा व्यवहार दूसरों के प्रति कैसा है। अपनी सामाजिक, व्यवसायिक व पारीवारिक जिम्दारियों को निभाते समय अपने व्यवहार और कर्तव्य का खयाल रखना भी जरूरी है। कार्यक्रम के प्रारम्भ में एक फिल्म दिखाकर संस्था के बारे में जानकारी देते हुए संदेश दिया गया कि हमारी खुशी तब तक पूरी नहीं होती जब तक कि हम दूसरों की शुशियों में शामिल नहीं होते। संस्था के मैन डिविजन, वुमैन डिविजन, यूथ डिविजन व फ्यूचर डिविजन के सदस्यों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर मानवाधिकारों के प्रति जागरूक करने का सफल प्रयास किया। संचालन नेहा कक्कड़ ने किया।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर मुख्य रूप से संस्था की पीआर हेड सुमिता मेहता, आनंद सूर्य नारायण, वीके कालरा, राजेश लाल, ज्योति लाल, सरिता रतन मनीष बंसल, रवि अग्रवाल, भारती टंडन, कर्नल मनोहर नायडू, देवेन्द्र ढल, पूरन डावर, हरविजय वाहिया, सुशील गुप्ता, रंजीव कौचर, राजीव गुलाठी, डॉ. संदीप अग्रवाल, डॉ. अपर्णा पोद्दार, डॉ. पारुल अग्रवाल, दीक्षा आसवानी, कविता ओबरॉय, राहुल अग्रवाल, मोहित जगोटा, मयंक कत्याल, नीना कथूरिया, डॉ. विवेक पांडे, रजत भाकरी आदि मौजूद थे।
प्रदर्शनी में लगाए गए 25 पैनल
जिनेवा से पहली बार भारत में लगाई गई प्रदर्शनी में लगे 25 पैनल मानवाधिकारों पर व्यापक चिंतन के लिए विवश करते दिखे। समस्याओं के समाधानों पर प्रकाश डालने के लिए हर पैनल के साथ संस्था का एक सदस्य व्याख्या करने के लिए मौजूद थे। बताया गया कि किस तरह सरकारी संस्थाओं के साथ गैर सरकारी संस्थाएं इसमें बेहतर भूमिका निभा सकती हैं। आज के परिवेश में स्कूलों में ह्यूमन राइट्स का शिक्षा बेहद जरूरी है। मानवाधिकार शिक्षा से प्रेरित व्यक्तियों के जीवन परिवर्तन की मर्मस्पर्शी कहानियां थीं जिनका संग्रह विश्व भर से (आस्ट्रेलिया, बुर्किना फासो, पेरु, पुर्तगाल, एव तुर्की जैसे देसों से) किया गया।
ह्यूमन राइट्स एजुकेशन से आस्ट्रेलिया में पुलिस और जनता के बीच बन पाया बेहतर रिश्ता
आगरा। प्रदर्शनी में पैनल के माध्यम से बताया कि किस तरह 1990 में आस्ट्रेलिया में पुलिस और आम जनता के बीच बिल्कुल भी सामन्जस्य नहीं था। आम लोग पुलिस के पास अपनी समस्या लेकर जाने से कतराते थे। लेकिन पुलिस को ह्यूमन राइट्स की शिक्षा देने के बाद इस स्थिति में सुधार हुआ।
आज डीपीएस में लगेगी प्रदर्शनी
16 अप्रैल को यह प्रदर्शनी दिल्ली पब्लिक स्कूल, शास्त्रीपुरम में सुबह 7.30 बजे से दोपहर 2 बजे तक स्कूली बच्चों के लिए लगेगी। प्रदर्शनी में लगे पैनल की व्याख्या करने के लिए स्कूली बच्चों को ट्रेंट किया गया है।