आगरालीक्स… आगरा के आंबेडकर विवि में अजब गजब मामला आया है, मार्कशीट के सत्यापन के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। मार्कशीट फर्जी निकली, कोर्ट ने एक लाख जुर्माने के साथ विवि को मुकदमा लिखाने की छूट भी दी है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जानकारी के मुताबिक वादी शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने राज्य सरकार और चार अन्य के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि आंबेडकर विवि आगरा उसकी डिग्री का सत्यापन नहीं कर रहा है। इसके जवाब में अतिरिक्त शिक्षा निदेशक ने 24 अप्रैल 2018 को जवाब दाखिल किया था। जवाब में कहा गया था कि वादी ने स्नातक की फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी प्राप्त की है। कोर्ट ने विवि को इस मामले की जांच कराने के निर्देश दिए थे। सात मई को हुई सुनवाई में सरकारी वकील विवेक वर्मा ने कोर्ट को बताया कि विवि ने वादी की डिग्री को फर्जी करार दिया है। शैलेन्द्र प्रताप की द्वितीय वर्ष की मार्कशीट पर नामांकन संख्या 0414866 दर्ज थी। जबकि विवि ने यह नामांकन छात्रा प्रियंका दीक्षित को दिया गया था। विवि ने ऐसी कोई मार्कशीट वादी को जारी ही नहीं की थी। यानि मार्कशीट भी फर्जी थी। इसी आधार पर डिग्री भी फर्जी घोषित की गई। अदालत ने आदेशों में कहा है कि जांच एजेंसी इस पर जल्द कार्यवाही कर फैसला सुनाए। चूंकि शैलेन्द्र ने फर्जीवाड़ा करने के बाद भी कोर्ट में आने की जुर्रत की है। लिहाजा वादी पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी किया गया है। जुर्माने की राशि इलाहाबाद के जिलाधिकारी को वसूल करने के आदेश दिए गए हैं। डीएम ही इस राशि को संबंधित जिले के विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करेंगे। कोर्ट ने विवि से कहा है कि विवि के वकील ने अधिकारी और क्रमचारियों को धमकाने का जिक्र भी किया है। लिहाजा ऐसी स्थिति में विवि पुलिस में रिपोर्ट दाखिल करने के लिए भी स्वतंत्र है। विवि के पीआरओ डा. गिरजाशंकर शर्मा ने इसकी पुष्टि की है।