आगरालीक्स… आगरा में विशेषज्ञों ने कहा कि ई कचरे के व्यापार में भी बेहतर भविष्य की अपार सम्भावनाएं हैं। इंटरनेशनल टेलीकम्यूनिकल यूनियन (आईटीयू) के आकड़ों के मुताबिक दुनिया का 80 फीसदी ई वेस्ट रिकार्डेड नहीं है। जबकि ई कचरे का सही तरीके से निस्तारण करने पर उसमें मौजूद सोना, चांदी व कॉपर जैसे तत्वों से मौटा मुनाफा कमाया जा सकता है। ई कचरे को 60 फीसदी तक रीयूज किया जा सकता है। इसके उलट ऐसा न करने पर हम वातावरण में जहर खोलकर उसे प्रदूषित कर रहे हैं और खतरनाक बीमारियों को न्यौता दे रहे हैं।
यह कहना था जामिया हमदर्द इंस्टीट्यूट दिल्ली में कम्प्यूटर साइंस के प्रो. अफशर आलम का। वह एसीई इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट कॉलेज में डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टैक्नोलॉजी द्वारा आयोजित इंस्पायर इंटरनशिप साइंस कैम्प में विद्यार्थियों को सम्बोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आज ई कचरे का सही तरीके से निस्तारण सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। क्योंकि यह व्यापार ऐसे असंगठित लोगों (रद्दी कचरे का काम करने वालों) के हाथ में है, जो उपयोगी सामान निकालने के बाद इसे मिट्टी या नदियों में फेंक रहे हैं। जिससे इसमें मौजूद हैवी मेटल (मरकरी, कैडमियम) हवा, नदियों और मिट्टी को प्रदूषित कर खेती व लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहे हैं। दुनिया में चायना और अमेरिका के बाद भारत सबसे अधिक ई कचरा पैदा करने वाला तीसरा देश है। इस पर गम्भीरता से नहीं सोचा गया तो भविष्य में गम्भीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। हालाकि सरकार भारत के 17 शहरों में 178 ई वेस्ट डिस्पोजल सेंटर बना रही है। लेकिन सिर्फ सरकार के प्रयासों के काम नहीं चलेगा। इसके लिए विद्यार्थियों में, नगर पंचायत व नगरपालिकओं को जोड़कर जागरुकता लाना जरूरी है। जिसमें 22 सेंटर यूपी में होंगे। इस अवसर पर कॉलेज के चेयरमैन संजय गर्ग व निदेशक संयम अग्रवाल भी मौजूद थे।
आईटीयू के आकड़ों के मुताबिक 60 हजार खराब मोबाइल यानि इ वेस्ट से हम यह यह मुनाफा कमा सकते हैः
सोनाः 340 ग्राम
चांदीः 3.5 किलोग्राम
कॉपरः 130 ग्राम
पैलेडियमः 140 ग्राम
2080 तक 5 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा तापमान
एनबीपीजीआर (नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जैनेटिक रिसोर्सिज) की डॉ. रश्मि यादव ने बताया कि पिछले 100 वर्षों में घरती का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है। एनबीपीजीआर के नुसार 2080 तक इसमें 5 डिग्री सेल्सियस तक इजाफा हो सकता है। धरती का तापमान बढ़ने से फलसों की उत्पादन पर प्रतिकूल असर पढ़ रहा है। भविष्य कीमुश्किलों को देखते हुए एनबीपीजीआर ने -20डिग्री सेल्सियस पर 4 लाख प्रकार की फसलों के बीजों को संरक्षित किया है।