आगरालीक्स… आगरा में ब्लड कैंसर के मरीजों को उम्मीद जगी है, ब्लड कैंसर को मात देने के साथ ही मरीज बेहतर जिंदगी जी सकते हैं। यह कहना है राजीव गांधी कैंसर हाॅस्पिटल नई दिल्ली के हीमेटोलाॅजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट विभाग के अध्यक्ष डा. दिनेश भूरानी का।
रेनबो हाॅस्पिटल एवं राजीव गांधी कैंसर हाॅस्पिटल के संयुक्त तत्वावधान में आगरा में पहली बार हिमेटोलाॅजी यानि रक्त संबंधी स्वास्थ्य शिविर लगाया गयाय। सिकंदरा स्थित रेनबो हाॅस्पिटल में सुबह 10 बजे से आरंभ होकर अपराहन 03 बजे तक चले शिविर में डा. दिनेश भूरानी सेवाएं प्रदान कर रहे थे। शिविर समाप्त होने तक उन्होंने 50 से अधिक मरीज देखे। इसमें एनीमिया, थैलीसीमिया, ब्लड डिस्क्रिसिस, ब्लड कैंसर के मरीजों की जांचें एवं परामर्श प्रदान किया गया। डा. दिनेश ने बताया कि ब्लड कैंसर का नाम सुनते ही लोग ये मान लेते हैं कि अब जीना मुश्किल है, लेकिन ऐसा नहीं है। कैंसर से पहले खून में गडबडी यानि ब्लड डिसआॅर्डर होता है। अगर समय रहते डिसआॅर्डर का पता लगा लिया जाए तो उसे कैंसर में तब्दील होने से रोका जा सकता है। ब्लड कैंसर का इलाज उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। शुरूआत में पता चलने पर यह पूरी तरह ठीक हो जाता है। कई मामलों में केवल एक गोली खाकर लोग सालों-साल जीवित रहते हैं तो कई बार कुछ खास तरह की दवाएं दी जाती हैं, लेकिन मरीज लंबी जिंदगी जीते हैं। वहीं कई तरह के कैंसर ऐसे भी हैं जिनका इलाज करना डाॅक्टरों के लिए चुनौती है। कुछ साल पहले जहां 15 फीसदी को ही उपचार से बचाया जा सकता था वहीं आज यह आंकडा रिस्क फैक्टर के अनुसार 50 से 70 फीसदी पर पहुंच गया है। अब टाॅरगेटिड कीमोथैरपी इलाज में काफी मददगार साबित हो रही है। पहले कीमोथैरेपी ही एकमात्र चारा था।

डा. दिनेश भूरानी के बारे में….
डा. दिनेश भूरानी राजीव गांधी कैंसर हाॅस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर, नई दिल्ली के रक्त संबंधी रोगों, रक्त कैंसर एवं बोन मैरो विभाग के सुपरस्पेशलिस्ट हैं। डा. भूरानी देश के प्रथम चिकित्सक हैं जिन्होंने हिमैटोओंकोलाॅजी में डीएम की डिग्री प्राप्त की। उनके द्वारा अब तक 600 से अधिक सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं।
क्या है हिमैटोलाॅजी ?
रक्त संबंधी बीमारियों के कारण, पूर्वानुमान, उपचार और रोकथाम के अध्ययन से संबंधी चिकित्सकीय प्रक्रिया को हिमैटोलाॅजी कहा जाता है। इसमें बीमारियों का इलाज करना शामिल है, जो रक्त कोशिकाओं, हीमोग्लोबिन, रक्त प्रोटीन, अस्थि मज्जा, प्लेटलेट, रक्त वाहिकाओं, प्लीहा और जमावट तंत्र पर प्रभाव डालती हैं। ऐसी बीमारियों में हीमोफीलिया, रक्त के थक्के, अन्य रक्तस्त्राव विकार और रक्त कैंसर, ल्यूकोमिया, एकाधिक माइलोमा और लिम्फोमा शामिल हो सकते हैं।