आगरालीक्स.. आगरा में 24 घंटे बाद पॉलीथिन पर रोक लग जाएगी, एक लाख तक का जुर्माना और जेल का भी प्रावधान है। चार जोनल कमिश्नर पॉलीथिन पर रोक की कार्रवाई करेंगे, इसके लिए टोल फ्री नंबर भी जारी किया गया है।
आगरा सहित यूपी में 15 जुलाई से 50 माइक्रॉन तक के पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगने जा रहा है।
इसके लिए नगर निगम के 100 वार्ड को चार जोन में बांटा गया है। इसमें चार जोनल कमिश्नर की तैनाती की गई है। जोनल कमिश्नर को अब पॉलीथिन की बिक्री रोकने की भी जिम्मेदारी दी गई है। जागरूकता अभियान के साथ ही कार्रवाई भी की जाएगी। डीएम रवि कुमार ने बताया कि शहरी क्षेत्र में पॉलीथिन की बिक्री को रोकने की जिम्मेदारी एडीएम सिटी की होगी। वहीं देहात में यह जिम्मेदारी प्रत्येक एसडीएम को दी गई है। 50 माइक्रॉन से कम की पॉलीथिन की बिक्री नहीं होगी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिबंध लगने के बाद दुकानों पर पॉलीथिन का इस्तेमाल करते पकडे जाने पर 10 हजार से एक लाख तक का जुर्माना लगेगा। व्यक्तिगत उपयोग पर एक से 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाना है। इसके साथ ही जेल का भी प्रावधान है।
नगर निगम के चार जोन
छत्ता जोन, विनोद कुमार गुप्ता संयुक्त नगरायुक्त
हरीपर्वत जोन, अनुपम शुक्ला सहायक नगरायुक्त
लोहामंडी जोन, तरुण शर्मा, मुख्य अभियंता सिविल
ताजगंज जोन, संजय कटियार मुख्य अभियंता यांत्रिक व विद्युत
पॉलीथिन पर रोक से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर
18001803015 पर संपर्क कर सकते हैं।
पर्यावरण विभाग ने 22 दिसंबर 2015 को अधिसूचना जारी कर सभी तरह के पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी। इसी मंशा के मुताबिक प्रदेश में अगर सभी तरह के पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया गया तो सरकार को अध्यादेश लाना पड़ेगा। प्रदेश में पॉलिथीन के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने की कवायद वर्ष 2000 में शुरू हुई थी, लेकिन इस बारे में अलग-अलग अधिनियमों के चलते अब तक इस पर अमल नहीं हो सका है। एक तो नगर विकास विभाग द्वारा वर्ष 2000 में ‘उप्र प्लास्टिक और अन्य जीव अनाशित कूड़ा-कचरा अधिनियम-2000’ लागू किया गया था।
इसके तहत 20 माइक्रॉन से कम की पॉलिथीन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था है। जबकि पर्यावरण विभाग के 22 दिसंबर 2015 में जारी अधिसूचना में सभी तरह के पॉलीथिन के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। इसी तरह केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचना में अब 50 माइक्रॉन से नीचे वाले पॉलिथीन को पर्यावरण के लिए खतरनाक बताया गया है।