आगरालीक्स.. आगरा सहित भारतीय मूल के 65 डॉक्टर लंदन में हैं, ये आगरा आएंगे, फोग्सी की अध्यक्ष डॉ जयदीप मल्होत्रा व पूर्व अध्यक्ष डॉ नरेंद्र मल्होत्रा के नेत्रत्व में फाॅग्सी ने लंदन में अपनी नई शाखा का गठन किया है।
इस क्रम में लंदन और भारतीय डाॅक्टरों के संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित होने जा रहे हैं, जिसमें से पहला प्रशिक्षण कार्यक्रम आगरा में होगा।
पांच जुलाई को लंदन द राॅयल काॅलेज आॅफ आॅब्सटेट्रिशियंस एंड गायनेकोलाॅजिस्ट में साउथ एशिया डे आयोजित किया गया। यह काॅन्फ्रेंस राॅयल काॅलेज और साउथ एशियन फेडरेशन आॅॅफ आॅब्सटेट्रिक एंड गायनेकोलाॅजी (सफाॅग) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई थी, जिसका हिस्सा आठ देश और उनके स्त्री एवं प्रसूति रोग संगठन रहे। साउथ एशिया डे में पहले दिन फाॅग्सी ने अपनी लंदन शाखा का गठन किया। इसमें भारतीय मूल के 65 डाॅक्टरों को शामिल किया गया है। लंदन से लौटने के बाद फाॅग्सी अध्यक्ष डा. जयदीप मल्होत्रा ने बताया कि लंदन में फाॅग्सी की 245 वीं शाखा का गठन एक बडी उपलब्धि है। इससे न सिर्फ लंदन में रह रहे भारतीय नागरिकों को लाभ मिलेगा बल्कि लंदन के चिकित्सक भारत में आकर भी अपनी सेवाएं प्रदान करेंगे। साथ ही भारतीय चिकित्सकों और लंदन में भारतीय मूल के चिकित्सकों के बीच आपसी ज्ञान साझा हो सकेगा। समय-समय पर संयुक्त प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किए जाएंगे ताकि नवीन और तकनीकी ज्ञान का आदान-प्रदान कर मरीजों को लाभ पहुंचाया जा सके।

समारोह के दूसरे दिन तकनीकी सत्रों के साथ ही पैनल डिस्कशन हुए। इसमें पूछ गए सवालों के जवाब में सैशन की अध्यक्षता कर रहे आगरा के डा. नरेंद्र मल्होत्रा ने कहा कि मात्र पांच फीसदी महिलाएं ही मीनोपाॅज के दौरान डाॅक्टर से संपर्क करती हैं। यानि लगभग 95 प्रतिशत महिलाएं मीनोपाॅज के दौरान होने वाले प्रतिकूल बदलावों के साथ लगभग एक तिहाई जिंदगी गुजार देती हैं, जिसका असर चिडचिडापन, नींद न आना, याददाश्त कमजोर आदि परिवार के अन्य सदस्यों पर भी पडता है। हार्मोन थैरेपी के बारे में विस्तार से बताते हुए डा. नरेंद्र ने कहा कि आज ऐसे कई साधन हैं जिससे मीनोपाॅज के दौरान होने वाले प्रतिकूल बदलाव के प्रभाव को कम कर महिलाएं 40 की उम्र के बाद भरी बिंदास जिंदगी जी सकती हैं। डा. जयदीप मल्होत्रा ने प्रसव के सीजेरियन तरीके और उसके परिणामों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सफाॅग की अध्यक्ष डा. रूबीना सोहेल, आरसीओजी की अध्यक्ष प्रो. लेजली रेगन, एमिरेटस आॅब्स एंड गायनी सोसाइटी के प्रो. सबरत्नम अरूल्कमरन, साउथ एशिया में आरसीओजी इंटरनेशनल काउंसलि की प्रतिनिधि डा. रेनी ठाकर, प्रो. फिरदोसी बेगम, डा. आसमा राना, प्रो. राशिद लतीफ खान, प्रो. टीए चौधरी, प्रो. सुधा शर्मा, प्रो. फारूख जैमन, प्रो. एबी भैयान, प्रो. हर्ष लाल सेनाविरत्ने, प्रो. आलोकेंदु चटर्जी आदि ने महत्वपूर्ण जानकारियां रखीं।

क्या है सफाॅग ?
साउथ एशियन फेडरेशन आॅफ आॅब्सटेट्रिशियन एंड गायनेकोलाॅजी (सफाॅग) दक्षिण एशिया देशों की आॅब्स एंड गायनी सोसाइटीज का प्रतिनिधित्व करता है। इस हिस्से में विश्व की पांचवें हिस्से की जनसंख्या रहती है। सामान्य समस्याओं के साथ ही प्रत्येक देश की एक अलग राजनैतिक और आर्थिक स्थिति है। इसीलिए स्वास्थ्य को और महिलाओं की समस्याओं को लेकर इनकी प्राथमिकताएं भी अलग हैं। सफाॅग का मुख्य उददेश्य है सदस्य देशों की राष्ट्रीय संगठन के साथ सहभागिता करना और आॅब्स एंड गायनी के क्षेत्र में ज्ञान बढाना। हैल्थ प्रोफेशनल्स को प्रशिक्षण देना।
ये देश रहे साउथ एशिया डे में शामिल….
भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, भूटान, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, मालदीव