आगरालीक्स…आगरा के एसएसपी अमित पाठक बनकर शातिरों ने इंस्पेक्टर से ठगी कर ली, मोबाइल बैंकिंग से शातिरों ने अपने खाते में रुपये डलवा लिए। इस तरह के तीन मामले सामने आए हैं, शातिर की तलाश में पुलिस जुटी हुई है।
गुरुवार को सैफई थाना प्रभारी चंद्रदेव यादव के सीयूजी नंबर पर फोन आया, कॉल करने वाले ने खुद को क्राइम ब्रांच आगरा का सब इंस्पेक्टर अरुण कुमार शर्मा बताया। उसने कहा कि तुम्हारे क्षेत्र में तीन चोरी की गाड़ियां हैं। कप्तान साहब बात करेंगे कहते हुए दूसरे शातिर को फोन दे दिया। दूसरा व्यक्ति एसएसपी आगरा अमित पाठक बनकर बात कर रहा था। थाना प्रभारी के जय हिंदू बोलते ही उसने पहले पूछा कि तुम्हारे एसएसपी कौन हैं? उनका सीयूजी नंबर बताओ। इसके बाद कहा कि नोट कर लीजिए। आप चोरी की गाड़ी पकड़ लेंगे या मैं अपनी टीम भेजूं? मुखबिर आपके क्षेत्र का ही है। वह गाड़ियों को पकड़वा देगा। इसके बाद कथित मुखबिर का नंबर दे दिया। इंस्पेक्टर ने दिए गए नंबर पर बात की तो उसने कहा कि मैं होटल में मिलने आ रहा हूं। पहले मेरे खाते में पांच हजार रुपये डाल दीजिए। गुडवर्क के झांसे में आकर इंस्पेक्टर ने मोबाइल बैंकिंग के माध्यम से अपने खाते से उसके बताए पीएनबी के खाते में पांच हजार रुपये जमा करा दिए।
दो और इंस्पेक्टर को बनाया निशाना
इसी अंदाज में थाना प्रभारी बड़पुरा व थाना प्रभारी ऊसराहार को कॉल किया। उनसे भी मुखबिर के खाते में रकम जमा करने को कहा। मगर, एसओ बड़पुरा जितेंद्र सिंह ने एसएसपी आगरा को शक हो गया। उन्होंने एसएसपी आगरा से कॉल कर पूछा तो हकीकत सामने आ गई। इसी तरह थाना प्रभारी ऊसरा हार भी ठगी से बच गए। एसएसपी बनकर कॉल करने वाला शातिर बुलंदशहर के जैनपुर निवासी नितिन बताया जा रहा है। वह पूर्व में कई बार जेल जा चुका है। उसकी कॉल करने के समय लोकेशन भी बुलंदशहर में ही थी। तीनों मामलों में अभी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। एसएसपी आगरा अमित पाठक ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। कॉल करने वाले पर विधिक कार्रवाई कराई जाएगी।