आगरालीक्स ..आगरा में एक युवक 50 रुपये का बर्गर लेने गया, लौटा तो मोबाइल पर 5000 के चालान का मैसेज आ गया, युवकी तनख्वाह आठ हजार है, उसके होश उडे हुए हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आगरा के कोतवाली क्षेत्र में बल्केश्वर निवासी आदित्य ज्वैलरी शोरूम पर काम करता है। वह शनिवार को शोरूम से फव्वारा तक बाइक से बर्गर लेने गया, गाडी खडी कर वह बर्गर लेने चला गया। बर्गर लेकर लौटा तो वहां पुलिस कर्मी खडा था, उसने हेलमेट के बारे में पूछा, उसने कहा कि पास में ही दुकान है इसलिए हेलमेट पहन कर नहीं आया। वह फव्वारा से शोरूम पर पहुंचा, उसके मोबाइल पर पांच हजार रुपये के चालान का मैसेज आ गया। इससे युवक हक्का बक्का रह गया है।
सब इंस्पेक्टर के नीचे के पुलिस कर्मी नहीं कर सकते चालान
सिविल पुलिस में सब इंस्पेक्टर से नीचे और ट्रैफिक पुलिस में हेड कांस्टेबल से नीचे के पुलिसकर्मी चालान नहीं कर सकते। सिपाही केवल गाड़ी को इशारा करके रोक सकते हैं। वे गाड़ी की चाबी भी नहीं निकाल सकते।
आपका चालान काटने के लिए ट्रैफिक पुलिस के पास उनकी चालान बुक या फिर ई-चालान मशीन होना जरूरी है। यदि इन दोनों में से कुछ भी नहीं है तो आपका चालान नहीं काटा जा सकता है।
कब हो सकता है चालान
कोई व्हीकल लावारिस हालत में खड़ा हो। जहां पार्किंग की इजाजत नहीं है, वहां पार्क किया गया हो। इस तरह से पार्क किया गया हो जिससे दूसरे लोगों को परेशानी हो रही हो।
कौन कर सकता है फाइन
सौ रुपये से ज्यादा का फाइन है तो हेड कांस्टेबल से ऊपर का ट्रैफिक ऑफिसर यानी एएसआइ या एसआइ ही कर सकता है। हेड कांस्टेबल को 100 रुपये तक का फाइन लेने का हक है। कांस्टेबल को फाइन करने का हक नहीं है। वे सिर्फ गाड़ी का नंबर नोट कर सकते हैं।
इस तरह होता है चालान
ऑन द स्पॉट चालान
ये चालान तब काटे जाते हैं, जब नियम तोड़ने वाले को पुलिस रंगे हाथों पकड़ लेती है और उसे चालान थमाकर वहीं जुर्माना वसूल लेती है। कोई अगर उस वक्त जुर्माना नहीं भरना चाहे तो पुलिस डीएल जमा कराकर चालान दे देती है, जिसे बाद में जमा कराया जा सकता है।
नोटिस चालान
अगर कोई नियम तोड़कर भाग गया तो पुलिस उसका नंबर नोट कर उसके घर चालान भिजवा देती है। इस चालान का जुर्माना भरने के लिए आरोपित को एक महीने का वक्त दिया जाता है। अगर समय पर जुर्माना नहीं भरा गया तो चालान कोर्ट भेज दिया जाता है।
कोर्ट के चालान
कोर्ट के चालान आमतौर पर कानून तोड़ने की ऐसी गंभीर घटनाओं में किए जाते हैं, जिनमें जुर्माना और सजा दोनों का प्रावधान है। शराब पीकर गाड़ी चलाना ऐसा ही मामला है। ये किए तो ऑन द स्पॉट ही जाते हैं, लेकिन इनका जुर्माना पुलिसकर्मी नहीं वसूलते। इसके लिए कोर्ट ही जाना होता है।