आगरालीक्स…देव दीपावली का पर्व कल मनाया जाएगा। इसे लेकर बाजारों में रौनक बिखरने लगी है। कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा और देव दीपावली कहा जाता है। पूर्णिमा के दिव व्रत रखकर गंगाघाटों पर दीपक जलाए जाते हैं। देव दीपावली को लेकर बाजारों में भी रौनक बिखरी हुई है। इस दिन खऱीदारी को भी शुभ माना जाता है।
भगवान भोलेनाथ द्वारा कार्तिक पूर्णिमा के दिन त्रिपुरासुर नामक असुर का अंत किया था। वे त्रिपुरारी के नाम से पूजित हुए थे। इसी दिन से देवता अपनी प्रसन्नता को दर्शाने के लिए गंगा घाट पर आकर दीपक जलाते हैं। इसी कारण इस दिन को देव दीपावली पर्व के रूप में मनाया जाता है।
शिव-शंकर के दर्शन कल्याणकारी
मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन कृतिका नक्षत्र में शिव शंकर के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है। इस दिन चंद्र जब आकाश में उदित हो रहा हो रहा हो, उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छह कृतिकाओँ का पूजन करने से शिवजी की प्रसन्नता प्राप्त होती है।
पूर्णिमा तिथि
-पूर्णिमा तिथि आरंभ 29 नवंबर दोपहर 12.47 से
-पूर्णिमा तिथि समाप्त 30 नवंबर दोपहर 2.59 तक
-देव दीपावली शुभमुहूर्त शाम 5.41 से 7.48 बजे तक
आज है बैकुंठ चतुर्दशी
कार्तिक मास की आज बैंकुठ चतुर्दशी है। कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को हेमलंब वर्ष में अरुणोदय काल में ब्रह्म मुहूर्त में स्वयं भगवान विष्णु ने वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पर स्नान किया। पाशुपत व्रत करके विश्ववेश्वर ने यहां पूजा की थी। भगवान शंकर ने भगवान विष्णु के तप से प्रसन्न होकर इस दिन पहले भगवान विष्णु फिर उनकी पूजा करने वाले हर भक्त को वैकुंठ पाने का आशीर्वाद दिया.