आगरालीक्स.. आगरा में वायु प्रदूषण से लोगों की सांस घुट रही है, इस वायु प्रदूषण के स्रोत क्या हैं, इससे पहचानने की जरूरत है, आगरा आईं पर्यावरण अभियन्ता कोकिल बंसल, अमेरिका ने आगरा डेवलेपमेंट फाउंडेशन की बैठक में वायु प्रदूषण के कारक और बचाव पर चर्चा की।
बुधवार को बैठक में इंजीनियर कोकिल बंसल ने कहा कि जब तक तक हमें यह नहीं मालूम होगा कि कौन-कौन से वायु प्रदूषण के कारण हैं और उनका क्या योगदान है, हम वायु प्रदूषण से लड़ने की प्रभावी रणनीति नहीं बना सकते हैं। आई0आई0टी0 कानपुर द्वारा जो आगरा के वायु प्रदूषण को लेकर अध्ययन किया जा रहा है, उसकी रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। वायु प्रदूषण के जो स्त्रोत अध्ययन से निकल कर आयें, उन पर रोक लगानी होगी। स्त्रोतों पर रोक लगने से ही वायु प्रदूषण की विकराल समस्या का हल संभव होगा। ताजमहल को बचाने के लिए बनाया जाने वाला विज़न प्लान बिना वायु प्रदूषण के कारणों को जाने नहीं बनाया जा सकता है।
पीएम 2 5 है घातक
उन्होंने कहा कि पी0एम0-2.5 व पी0एम0-10 तरह-तरह के होते हैं और उनका प्रभाव भी अलग-अलग होता है और यह अध्ययन किया जाना आवश्यक है कि ये किस प्रकार के हैं। आगरा की सड़कों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि इन सड़कों की पटरियाँ पक्की होनी चाहिए और सड़कों के दोनों ओर की खाली भूमियाँ भी हरियाली युक्त होनी चाहिए। सड़कों की पटरियाँ और उनके आसपास की भूमि धूल का कारण बनती हैं, जो वाहनों से निकलने वाली प्रदूषित वायु से मिलकर हानिकारक बन जाती है। सड़कों की धूल को न्यूयॉर्क व अन्य शहरों में बड़ी बड़ी मशीनों से इकट्ठा किया जाता है और इसी तरह से आगरा की सड़कें भी उसी तर्ज पर साफ होनी चाहिए। वहाँ सड़क सफाई का निर्धारित समय होता है और उस समय वाहनों का पार्किंग में खड़ा किया जाना भी मना होता है। वायु प्रदूषण से बचने के लिए ‘एक्टिवेटिड कार्बन मास्क’ के प्रयोग की बात भी सुश्री बंसल द्वारा रखी गई जो हैवी मैटल को एबज़ॉर्ब कर लेते हैं। औद्योगिक संस्थानों में ‘बैग हाउस फिल्टर’ लगाये जाने की बात भी रखी गई।
बैठक में ए0डी0एफ0 सचिव के0सी0 जैन द्वारा यह विचार रखा गया कि आगरा के उत्तर व उत्तर-पूरब से आने वाली हवायें ताजमहल को नुकसान पहुंचाती हैं इसलिए विन्ड-ब्लॉकर के रूप में इस दिशा में बड़े-बड़े पेड़ों की ग्रीन बैल्ट बननी चाहिए।
बैठक मे यह भी चर्चा हुई कि आगरा में वन क्षेत्र 6-7 प्रतिशत ही हैं और जब तक निजी भूमि पर सघन वृक्षारोपण नहीं होगा, वायु प्रदूषण को नहीं रोका जा सकता है, जिसके लिए निजी भूमि पर वृक्षों के काटने की स्पष्ट अनुमति हो। इस सम्बन्ध में राजकुमार चाहर द्वारा बताया गया कि गांवों में खेतों की मेड़ों पर अब किसानों ने वृक्ष लगाना बंद कर दिया है क्योंकि पार्टीबन्दी के चलते वे पेड़ों को काट नहीं पाते हैं।
बैठक में हेमन्त जैन द्वारा यह कहा गया कि टी0टी0जैड0 क्षेत्र में वाहनों का प्रवेश न हो, इसके लिए टी0टी0जैड0 क्षेत्र के बाहर पैरीफैरल बाईपास का निर्माण होना चाहिए, जैसा कि दिल्ली में है और जो वाहन टी0टी0जैड0 क्षेत्र से निकलें उनसे बड़ा शुल्क लिया जाना चाहिए ताकि वे इस क्षेत्र में प्रवेश ही न करें। इंजीनियर ऋषि जैन द्वारा कूड़ा व अलाव जलाये जाने को रोकने की बात रखी गई ताकि उससे निकलने वाला धुंआ वायु को प्रदूषित न करे। किशोर खन्ना द्वारा वायु प्रदूषण को लेकर घटती हुई आयु और बढ़ती हुई बीमारियों के प्रति चिंता व्यक्त की और वायु प्रदूषण के विरुद्ध बड़े स्तर पर जागरुकता उत्पन्न करने और व्यापक अभियान छेड़ने की बात रखी गई। बैठक में हिमांशु अग्रवाल, अनिल अग्रवाल आदि भी उपस्थित थे।