आगरालीक्स…बच्चे सारा दिन मोबाइल देखते हैं, उनमें गेम खेलते हैं तो इसके केवल उनके माता—पिता ही दोषी. आगरा के बल्केश्वर पार्क में इंद्रेश महाराज ने भागवत कथा में दिए उपदेश. कथावाचक अरविंद जी महाराज भी पहुंचे…
विख्यात कथा व्यास आचार्य इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि व्यक्ति का जीवन हर दिन चुनौतियों से भरा होता है। उन चुनौतियों का सामना हिम्मत के साथ करना चाहिए । चुनौतियों से भागने वाला या शॉर्टकट अपनाने वाला भगवान को प्रिय नहीं। अगर आप गलत है तो चिंता मत करिए, प्रभु एक दिन स्वयं आपके सत्य को उजागर करेंगे, इसलिए निश्चित होकर जीवन जीएं। बल्केश्वर महादेव भक्त मंडल द्वारा बल्केश्वर पार्क में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का मंगलवार को तीसरा दिन था। उन्होंने नरसिंह अवतार, वामन अवतार का प्रसंग बड़े ही रोचक ढंग से सुनाया। कथा की शुरुआत उन्होंने- संकट हरेंगी, करेंगी भली वृषभान की लली, भक्ति गीत से किया। उन्होंने कहा कि आजकल बच्चों में मोबाइल का एडिक्शन हो गया है। वे सारे दिन मोबाइल देखते हैं, उन पर गेम खेलते है। उसके लिए कोई और दोषी नहीं, केवल, माता पिता दोषी है। क्यों उन्होंने बच्चो को भागवत जी या भक्ति की पुस्तक नहीं पकड़ाई। बच्चों को जीवन सुधारना हो तो बचपन से तोता , मैना, मैं हाथी जैसी कविता सुनाने के बजाए हरि के गीत याद कराओ। जगन्नाथ चकानंद जैसे भजन हम इसलिए सुनाते हैं, ताकि बच्चो पर भक्ति का असर हो, जीवन का कल्याण हो।सारे वेदों का सार है भागवत
इंद्रेश जी ने कहा कि महादेव जी पर जितना भी दूध चढ़ाया हो, एकादशी पर जितने व्रत किए हों, गंगा स्नान किया हो, उसका फल है भागवत का श्रवण करना। भागवत सुनने वालों को कोई फल नहीं मांगना चाहिय, क्योंकि यह स्वयं ही फल है और फल रस देता है, भूख की निवृत्ति करता है। फल से बीज मिलते हैं, जो अन्य पौधों को रोपने के काम आता है। यानी भागवत कथा सुनने से यश कीर्ति, धन संपत्ति आदि अर्जित की भूख खत्म हो जाती है। सब तृप्त हो जाते हैं। भक्ति का रस होता है, जो जीवन का कल्याण करता है।
उन्होंने कहा कि भगवान की शब्द मय मूर्ति है श्रीमद् भागवत। भगवान कृष्ण भागवत के रूप में विद्यमान है। भागवत जी का चिंतन करो, मनन करो।
आत्म हत्या करने वाले प्रेत बनते हैं
इंद्रेश जी का कहना था कि आत्महत्या करना सबसे बड़ा पाप है। क्योंकि जो भी आत्महत्या करते हैं, उन्हें 2000 वर्ष तक प्रेत योनि का भोग भोगना पड़ता है। प्रेत वह बनता है, जिसे नरक में भी जगह नहीं मिलती। प्रेत योनि बहुत कष्ट दायक होती हैं।
धर्म और परम धर्म की परिभाषा करते हुए इंद्रेश जी ने कहा कि अपने कल्याण की कामना धर्म, सबके कल्याण की भावना परम धर्म है। अतंकरण से धार्मिक कथाएं सुनना भी परम धर्म है। इससे इससे आत्मा बुद्धि, मन पवित्र होते हैं। परम धर्म करने की इच्छा प्रकट हो जाए, यही भागवत का विषय है। मुख्य यजमान हरीश अग्रवाल तरूना अग्रवाल ने आरती की। इस मौके पर भोलानाथ अग्रवाल वीरेन्द्र कुमार शिवशंकर रैपुरिया बसंत गोयल कुसुम गोयल प्रीति अग्रवाल रजनी अग्रवाल सोभित अग्रवाल सुरभि अग्रवाल आदर्श नन्दन गुप्त ऋषि अग्रवाल गोपाल कपूर हरिकिशन सिंघल रामगोपाल गुप्ता आदि मौजूद रहै।
श्रद्धा का चरमोत्कर्ष: अरविंद जी महाराज
भागवत कथा में विख्यात कथा वाचक संत अरविंद जी महाराज भी पधारे। उन्होंने कहा कि जब अधर पर मुस्कान आ जाए, आंखों में आंसू निकल आए तो समझिए यह श्रद्धा का चरमोत्कर्ष है । ऐसा मैंने यहां आकर अनुभव किया। आगरा में ऐसे रसिक श्रोता हैं कि भजन पर तीन घंटे भी लगातार नृत्य कर सकते हैं। ऐसी इंद्रेश जी की वाणी है।
इनके अलावा अनेक संत, महंत वृंदावन से आए और उन्होंने भी प्रवचन दिए।