आगरालीक्स…जैन साध्वियों की मौत पर आगरा के जैन समाज में फूटा आक्रोश, सैकड़ों लोगों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर दिया ज्ञापन, बोले—संत सुरक्षित नहीं तो समाज कैसे सुरक्षित?
मध्य प्रदेश के रीवा में विहाररत जैन साध्वियों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर सोमवार को आगरा में जैन समाज का आक्रोश खुलकर सामने आया। आगरा दिगम्बर जैन परिषद के नेतृत्व में सोमवार को सकल जैन समाज के सैकड़ों लोगों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार एवं मध्य प्रदेश सरकार को संबोधित ज्ञापन सौंपा। समाज ने घटना की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच, विहाररत जैन साधु-संतों की सुरक्षा और राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति लागू करने की मांग उठाई। जैन साध्वियों की मौत पर फूटा आक्रोश, सैकड़ों लोगों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर दिया ज्ञापन, संत सुरक्षित नहीं तो समाज कैसे सुरक्षित? जैन समाज ने उठाई राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति की मांग आगरा कलक्ट्रेट पहुंचकर सोमवार को ज्ञापन सौंपते जैन समाज के लोग। ज्ञापन में कहा गया कि रीवा में पूज्य आर्थिका माताजी के साथ हुई घटना सामान्य सड़क हादसा नहीं लगती, बल्कि उपलब्ध वीडियो फुटेज, परिस्थितियों और तथ्यों को देखते हुए समाज में गहरी आशंका और चिंता का माहौल है। जैन समाज ने पूरे मामले की एसआईटी अथवा न्यायिक जांच कराने की मांग की।
आगरा दिगम्बर जैन परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि जैन साधु-संत पूर्णतः अहिंसक, निहत्थे और पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं। वे किसी प्रकार की सुरक्षा या भौतिक संसाधनों का उपयोग नहीं करते। ऐसे में उनके साथ लगातार बढ़ रही दुर्घटनाएं और हमले बेहद चिंताजनक हैं। ज्ञापन में मांग की गई कि घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए तथा दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए। यदि जांच में किसी सुनियोजित साजिश या षड्यंत्र के तथ्य सामने आते हैं, तो आरोपियों पर कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।
जैन समाज ने विहार मार्गों पर संत सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की भी मांग की। इसमें संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण, चेतावनी संकेतक और हाईवे तथा भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही गई। साथ ही भारत सरकार से पैदल विहार करने वाले संतों के लिए राष्ट्रीय स्तर की गाइडलाइन और सुरक्षा एसओपी तैयार करने की मांग भी उठाई गई। ज्ञापन में कहा गया कि संत आत्मरक्षा नहीं करते और न ही सुरक्षा साधनों का उपयोग करते हैं, इसलिए संतों के खिलाफ होने वाले अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखा जाना चाहिए। समाज ने स्थानीय स्तर पर संत सिक्योरिटी कोऑर्डिनेशन सेल और आपात कालीन संपर्क व्यवस्था स्थापित करने की मांग भी की।

