आगरालीक्स…आगरा में आरटीई के तहत एडमिशन न लेने वाले 50 स्कूल. डीएम ने 8 स्कूलों के नाम भी बताए…चेतावनी देते हुए कहा, अपात्र कहकर आप गेट से उन्हें भगा रहे हैं—एडमिशन लेना आपका काम, पात्र है या नहीं, वो हमारा…
जिलाधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009, के अंतर्गत वर्ष-2026-27 में गरीब बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने हेतु बेसिक शिक्षा विभाग व सभी निजी स्कूलों के प्रिंसिपल व प्रबंधन के साथ समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में सर्व प्रथम जिलाधिकारी ने ऐसे सभी निजी स्कूलों की सूची तलब की जिनके द्वारा स्कूल आवंटित होने तथा अभिभावकों द्वारा लगातार स्कूल में संपर्क करने पर भी प्रवेश नहीं दिया गया है, बीएसए द्वारा ऐसे 50 स्कूलों की सूची प्रस्तुत की जिसमें संबंधित स्कूल को आवंटित कुल बच्चे, कुल प्रवेशित बच्चों की संख्या, प्रवेश न देने का कारण आदि का ब्यौरा दर्ज था. जिलाधिकारी ने क्रमानुसार स्कूल प्रिंसिपल व प्रबंधन से बैठक में कड़ाई से जवाब तलब किया जिसमें कुछ स्कूलों द्वारा बताया गया कि कतिपय अभिभावकों द्वारा पात्रता न होने पर भी गलत अभिलेख लगा कर प्रवेश लिया जा रहा है, कुछ प्रकरणों में बच्चों के माता पिता द्वारा स्कूल में संपर्क नहीं किया गया है तथा कुछ अभिभावक स्वयं प्रवेश हेतु इच्छा नहीं रखते हैं।बैठक में जिलाधिकारी ने स्कूल वाइस सूची पढ़ कर सुनाते हुए बताया कि सुमित राहुल गोयल मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आवंटित 22 बच्चों के सापेक्ष शून्य प्रवेश, सिंपकिंस सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आवंटित 22 बच्चों के सापेक्ष शून्य प्रवेश, द इंटरनेशनल स्कूल आगरा में आवंटित 17 बच्चों के सापेक्ष शून्य प्रवेश, होली पब्लिक स्कूल, सिकन्दरा में आवंटित 10 बच्चों के सापेक्ष शून्य प्रवेश, गायत्री पब्लिक स्कूल में आवंटित 09 बच्चों के सापेक्ष शून्य प्रवेश हुए हैं साथ ही होली पब्लिक किड्स स्कूल, आलमगंज, लोहामंडी में आवंटित 07 बच्चों के सापेक्ष शून्य प्रवेश, एसएमडी प्राइमरी स्कूल, नाई की मंडी में आवंटित 09 बच्चों के सापेक्ष शून्य तथा होली लाइट पब्लिक स्कूल लडामदा, आगरा में आवंटित 03 बच्चों के सापेक्ष शून्य प्रवेश होने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए पूछा कि क्या ये सभी बच्चे पात्रता धारण नहीं करते या इनके अभिभावक प्रवेश हेतु अनिच्छुक हैं।
जिलाधिकारी ने इस स्थिति पर संबंधित स्कूल प्रबंधन को कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित को फटकार लगाई। जिलाधिकारी ने कहा कि आप के यहां गेट से अभिभावकों को भगाने, बार बार कागजी कार्यवाही के बहाने बनाकर अभिभावकों को चक्कर लगवाने, पात्रता की जांच के नाम पर पात्र बच्चे को प्रवेश से वंचित करने की लगातार शिकायत प्राप्त हो रही हैं, जिलाधिकारी ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में बताया कि दुर्बल वर्ग से आता है कि नहीं, पात्रता धारण करता है या नहीं इसकी जांच करना आपका काम नहीं है और नहीं आपका अधिकार है, आप बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा लॉटरी के माध्यम से आवंटित प्रत्येक बच्चे का प्रवेश सुनिश्चित करें, आपको प्रथम दृष्टया लगता है कि पात्रता धारण नहीं करता तो प्रथमतः बच्चे का प्रवेश लें तत्पश्चात जिला प्रशासन को सूचित करें उसकी जांच की जाएगी।जिलाधिकारी ने व्यवस्था देते हुए कहा कि इस प्रकार के किसी प्रकरण में आप अभिभावक से अंडरटेकिंग लिखवा लीजिए कि जांच में पात्र न मिलने पर प्रवेश निरस्त कर दिया जाएगा, जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि बिना अंडर टेकिंग भी सूची अनुसार आपको प्रवेश सुनिश्चित करना होगा। जिलाधिकारी ने बीएसए को निर्देशित किया कि स्कूल से यदि किसी अपात्र प्रकरण की शिकायत आती है तो उसकी गहन जांच करा दोषी पाए जाने पर संबंधित अभिभावक के विरुद्ध भी कठोर कार्यवाही करते हुए एफआईआर दर्ज कराई जाए।
जिलाधिकारी ने बीएसए को निर्देशित किया कि कल तक अभिभावकों से बात कर ऐसे सभी बच्चों की सूची जो आवंटित स्कूल दूर होने या अन्य कारण से आवंटित स्कूल में प्रवेश हेतु इच्छा नहीं रखते को देने के निर्देश दिए।बैठक में जिलाधिकारी ने प्रवेश न लेने वाले सभी निजी स्कूलों को एक सप्ताह का समय देते हुए प्रवेश पूरा कराने के कड़े निर्देश के साथ कहा कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अंतर्गत वर्ष 2026-27 में आवंटित गरीब बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित कराया जाए अभी तक प्रवेश न देने पर अब आपके विरुद्ध प्रशासन कड़े एक्शन की तैयारी में हैं। उन्होंने स्कूल प्रधानाचार्य व प्रबंधन से स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा है कि एक सप्ताह में हर हाल में सभी पात्र बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया जाए, इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई,लापरवाही,बहानेबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आरटीई के अंतर्गत जनपद में लगभग 8112 आवंटनों के सापेक्ष अब तक करीब 6100 बच्चों का ही प्रवेश कराया जा सका है, जिस पर जिलाधिकारी ने कड़ा संज्ञान लिया है। जिलाधिकारी ने शेष बच्चों के प्रवेश को लेकर अब निजी स्कूलों के विरुद्ध फील्ड स्तर पर तेज और निर्णायक कार्रवाई के संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि जिन बच्चों का अब तक प्रवेश नहीं हुआ है, उनकी सूची तैयार कर तत्काल प्रभाव से नामांकन कराया जाए, उन्होंने कहा कि यदि एक भी प्रकरण ऐसा संज्ञान में आया कि अभिभावक बच्चे को लेकर प्रवेश हेतु गया और स्कूल द्वारा उसे भगा तथा पूरी प्रक्रिया की सख्त मॉनिटरिंग के निर्देश देते हुए शिक्षा विभाग को प्रतिदिन प्रगति की समीक्षा करने को कहा है. उन्होंने सभी एबीएसए को समयबद्ध लक्ष्य हासिल करने के लिए पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करने को निर्देशित किया,किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता मिलने पर कड़ी कार्रवाई तय है और जिम्मेदार सीधे कार्रवाई की जद में आएंगे.
जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहती हैं. इन सीटों पर चयनित बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित कराना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी होती है
बैठक में ऐसे स्कूल जिनके पास अपने वाहन नहीं है तथा जो बच्चों को लाने लेजाने हेतु अभिभावकों की जिम्मेदारी तय कर वाहनों के चालकों का सत्यापन कराने, फिटनेस, परमिट रिन्यूअल से बचते हैं उनकी भी जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती प्रतिभा सिंह, बीएसए जितेंद्र कुमार गोंड, एआरटीओ आलोक अग्रवाल सहित सभी खंड शिक्षा अधिकारी व निजी स्कूलों के प्रधानाचार्य व प्रबंधन के प्रतिनिधि मौजूद रहे।