आगरालीक्स..आगरा में 20 दिन की जंग के बाद स्वस्थ होकर घर लौटा नवजात, डॉ. राहुल देव शर्मा और पुष्पांजलि हॉस्पिटल की बड़ी सफलता
पुष्पांजलि हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, आगरा के चिकित्सकों ने एक अत्यंत जटिल एवं दुर्लभ जन्मजात विकार से पीड़ित समय से पूर्व (Preterm) जन्मे मात्र 1.6 किलोग्राम वजन के नवजात शिशु का सफल उपचार कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड जांच में ही शिशु में बाईं ओर जन्मजात डायफ्रामेटिक हर्निया (Left Congenital Diaphragmatic Hernia - CDH) का पता चल गया था। इस बीमारी में पेट के अंग डायफ्राम में छिद्र के माध्यम से छाती के भीतर पहुंच जाते हैं, जिससे फेफड़ों का विकास बाधित हो जाता है। इस नवजात में विशेष रूप से बायां फेफड़ा अत्यंत अविकसित (Poorly Developed Left Lung) था, जिसके कारण जन्म के बाद उसके जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा था।शिशु का जन्म वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. कामिनी खुराना की देखरेख में हुआ। जन्म के तुरंत बाद नवजात को गंभीर श्वसन कष्ट के कारण नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में भर्ती किया गया, जहां बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुभाव जैन एवं डॉ. विवेक की टीम ने उसकी गहन निगरानी एवं चिकित्सा प्रारंभ की। स्थिति का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करने के पश्चात, बाल शल्य चिकित्सक (Pediatric Surgeon) डॉ. राहुल देव शर्मा ने जन्म के दूसरे दिन ही शिशु का ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। अत्यंत कम वजन एवं अपरिपक्वता (Prematurity) के बावजूद, शिशु का ऑपरेशन थोराकोस्कोपी (Thoracoscopic Surgery) तकनीक द्वारा सफलतापूर्वक किया गया।
डॉ. राहुल देव शर्मा ने बताया कि यह ऑपरेशन आगरा एवं आसपास के क्षेत्र में पहली बार इतने कम वजन और जटिल स्थिति वाले नवजात में थोराकोस्कोपिक तकनीक द्वारा किया गया है। इस आधुनिक मिनिमली इनवेसिव तकनीक में छोटे-छोटे छिद्रों के माध्यम से कैमरे और विशेष उपकरणों की सहायता से सर्जरी की जाती है, जिससे दर्द कम होता है, संक्रमण का जोखिम घटता है तथा रिकवरी तेजी से होती है। सर्जरी के दौरान पेट के अंगों को पुनः उनके सामान्य स्थान पर स्थापित किया गया तथा डायफ्राम में मौजूद जन्मजात छिद्र को सफलतापूर्वक बंद किया गया। ऑपरेशन के पश्चात शिशु को लगभग 20 दिनों तक NICU में विशेषज्ञ निगरानी में रखा गया, जहां चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने दिन-रात अथक प्रयास कर उसकी देखभाल की।लगातार चिकित्सा, श्वसन सहायता एवं पोषण प्रबंधन के बाद शिशु की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। वर्तमान में शिशु पूर्णतः स्वस्थ है, स्वयं दूध पी रहा है, उसका वजन बढ़ रहा है तथा उसे सफलतापूर्वक अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। इस अवसर पर डॉ. राहुल देव शर्मा ने कहा कि जन्मजात डायफ्रामेटिक हर्निया एक गंभीर बीमारी है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान समय पर निदान, विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम (Multidisciplinary Team) और आधुनिक शल्य चिकित्सा तकनीकों की सहायता से ऐसे बच्चों को नया जीवन दिया जा सकता है। पुष्पांजलि हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के प्रबंधन ने इस सफलता को टीमवर्क, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और समर्पित चिकित्सकीय सेवाओं का परिणाम बताया तथा पूरे चिकित्सा दल को बधाई दी।
उपचार टीम:
- डॉ. राहुल देव शर्मा – बाल शल्य चिकित्सक (Pediatric Surgeon)
- डॉ. कामिनी खुराना – स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ
- डॉ. अनुभाव जैन – बाल रोग विशेषज्ञ एवं नवजात विशेषज्ञ
- डॉ. विवेक – बाल रोग विशेषज्ञ एवं नवजात विशेषज्ञ
यह सफलता आगरा क्षेत्र में नवजात एवं बाल शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है और भविष्य में ऐसे जटिल मामलों के उपचार हेतु नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करेगी।