आगरालीक्स…मां और मौसी के साथ गोवर्धन परिक्रमा लगाने गए थे प्रिंस और मनीष. मानसी गंगा में डूबने से दोनों चचेरे भाइयों की मौत पर रोया पूरा गांव. शोक और दुख में नहीं जले चूल्हे…
अपनी मां और मौसी के साथ गोवर्धन परिक्रमा लगाने गये दो बच्चों की गोवर्धन स्थित मानसी गंगा में स्नान के दौरान डूबने से मृत्यु हो गयी। दोनो बच्चों के शवों को एनडीआरएफ और पुलिस टीम ने निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं घटना के बाद से घर पर कोहराम मचा हुआ है। थाना मनसुखपुरा के गांव कएडी के दो बच्चों की मानसी गंगा में डूबकर मृत्यु होने के बाद समूचे गांव में शोक की लहर छाई रही। मृतक के घरों में लोगों की भीड़ लगी रही है।इनके परिवार के आकाश तोमर ने बताया कि शुक्रवार शाम करीब चार बजे कएडी निवासी मनीष पुत्र सत्यभान उम्र 14 वर्ष अपनी मां मिथलेश और प्रिंस पुत्र रामकिशन उम्र 15 वर्ष अपनी मां राधा और मिथलेश की छोटी बहन अविवाहित बहन क्षमा के साथ गोवर्धन परिक्रमा लगाने के लिए घर से निकले थे। रातभर परिक्रमा देने के बाद शनिवार सुबह करीब 5 बजे सभी लोग परिक्रमा पूरी करके गोवर्धन के जतीपुरा स्थिति मुखारविंद मंदिर पर मानसी गंगा में सभी लोगों स्नान करने लगे। इसी दौरान दोनों बच्चे मनीष और प्रिंस भी स्नान करने लगे तभी पैर फिसलने से दोनों बच्चे डूब गये। जिनमें मनीष पहले डूब गया और प्रिंस बाद में डूब गया। पानी की गहराई होने के कारण स्वजन कोई पता नहीं लगा सके। तभी चीख-पुकार मच गई। मौके पर पुजारियों की सूचना पर पुलिस और स्थानीय गोताखोरों ने बच्चों को तलाशने का अभियान शुरू किया। तभी सूचना पर एनडीआरएफ टीम भी आ गयी। करीब एक घंटे बाद सुबह 6 बजे मनीष के शव को निकाला लिया गया और प्रिंस का शव दस बजे निकाल लिया गया है। पुलिस ने दोनों बच्चों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जो शाम करीब सात बजे गांव पहुंचे जहां रोते बिलखते स्वजन द्वारा अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
दोनों चचेरे भाईप्रिंस और मनीष दोनों चेचेरे भाई है। दोनों की मां राधा देवी और मिथलेश सगी बहनें हैं। तो पिता सत्यभान और रामकिशन भी सगे भाई थे। जिनमें प्रिंस के पिता रामकिशन की करीब आठ वर्ष पूर्व मृत्यू हो चुकी है। जबकि मनीष के पिता सत्यभान अहमदाबाद में प्राइवेट नौकरी करते हैं। प्रिंस की एक बहन है गौरी और मनीष की दो बहनें हैं। काजल और भावना ।
गांव में नहीं जले चूल्हे
घटना की जानकारी गांव में सुबह करीब सात बजे लोगों को मिल गई। जिसके बाद स्वजन में गहरा मातम छा गया। साथ ही पूरे गांव में शौक की लहर दौड़ गयी। पूरा गांव इनके घरों पर दिनभर बैठा रहा। शौक और दुख के कारण पूरे गांव में चूल्हे तक नहीं जले हैं।