आगरालीक्स…Agra News: आगरा के दो कारोबारियों को व्हाटस एप ग्रुप से जोड़कर करोड़ों का मुनाफा कमाने के लिए एक करोड़ का निवेश करा दिया। मुनाफा मांगा तो पता चला कि साइबर ठगों ने एक करोड़ की ठगी कर ली। ( Agra Live News: Two Businessman duped Rs One crore for Investment offer by cyber Criminals in Agra )
आगरा के ताजगंज के कसरेट बाजार के रहने वाले पुलकित गोयल ने पुलिस को बताया कि वह सानिया जोशी के नाम से चल रहे व्हाटस एप ग्रुप से जुड़ा, ग्रुप का नाम 610 बार्कलेज स्मार्ट स्टॉक पिक्स था, ग्रुप निवेश के लिए लोगों को निर्देशित करता था, मोटा मुनाफा देखकर पुलकित अग्रवाल ने 12 जनवरी से 28 फरवरी के बीच 57.55 लाख रुपये का निवेश किया, यह रकम व्हाटस एप ग्रुप के लिंक पर दिखाई भी दे रही थी, जब उन्होंने मुनाफा देने के लिए कहा तो उनसे और पैसे मांगे जाने लगे इस पर उन्हें ठगी का पता चला और साइबर सेल में शिकायत की।
फिलिंग स्टेशन के खाते से ट्रांसफर किए रुपये
दूसरा मामला पिनाहट के रहने वाले पेट्रोल पंप संचालक भदरौली निवासी दिग्विजय सिंह तोमर का है, उन्होंने पुलिस को बताया कि फरवरी में फेसबुक पर एक व्यक्ति से दोस्ती हुई, उसने अपना व्हाटस एप नंबर दिया। इसके बाद दोनों के बीच में बात होने लगी। उसने एक व्हाटस एप का लिंक भेजा, लिंक से जुड़ते ही निवेश करने पर मोटा मुनाफा कमाने का झांसा दिया जाने लगा। उन्होंने अपने फिलिंग स्टेशन के खाते और एक अन्य खाते से 45.52 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब मुनाफा मांगा तो और पैसे मांगे जाने लगे इसके बाद ठगी का पता चला, पुलिस जांच में जुटी हुई है।
साइबर ठगी होने पर 1930 पर कॉल करें, cybercrime.gov.in पर रिपोट्र कर सकते हैं
मुख्य कोषाधिकारी रीता सचान का कहना है कि साइबर ठगो द्वारा पेंशनरों को डिजिटल अरेस्ट कर कई लाख रुपये विभिन्न एकाउंट में ट्रांसफर करा लिये गयें इनमें अभी कुछ दिन पूर्व ही एक महिला शिक्षिका द्वारा 32 लाख रूपये खाते में ट्रासंफर करा लिया गया।
पेंशनरों को सूचित किया जाता है कि वे किसी भी अनजान कॉल को न उठायें तथा किसी के धमकाने और झूठा भय दिखाकर डराने पर अनजान लोगों के जाल में न फसें और न ही किसी लालच में आयें। ऐसी स्थिति आने पर तत्काल परिवार के सदस्यों को तथा पुलिस को सूचित अवश्य करें। लीड बैंक कनारा के मैनेजर ऋषिकेश बनर्जी ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट एक गंभीर साइबर फ्रॉड है, जिसमें अपराधी पुलिस/RBI अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर डराते हैं। आरबीआई के अनुसार, ऐसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है और न ही वे वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी करते हैं। सतर्क रहें, पैसे न भेजें, और तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें