आगरालीक्स…आगरा के गुरुकुल दिवस के रूप में सेंट लॉरेन्स सेमीनेरी में मनाया वार्षिक समारोह
प्रतापपुरा स्थित सेंट लॉरेन्स सेमीनेरी (गुरुकुल) में वार्षिक समारोह ‘गुरुकुल दिवस’ श्रद्धा, गरिमा एवं उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर आगरा के महाधर्माचार्य आर्चबिशप डॉ. राफी मंजलि ने अपने संदेश में कहा कि “गुरुकुल साधना एक लंबी तीर्थयात्रा के समान होती है, जिसमें अनेक उतार-चढ़ाव आते हैं। जो साधक इस साधना को धैर्य, समर्पण और निष्ठा के साथ पूर्ण करता है, उसी का अभिषेक होता है।” उन्होंने गुरुकुल शिक्षा को आध्यात्मिक एवं मानवीय मूल्यों के निर्माण का आधार बताते हुए छात्रों को सेवा, त्याग और अनुशासन के मार्ग पर अग्रसर रहने का आह्वान किया।कार्यक्रम का शुभारम्भ गुरुकुल प्रार्थनालय में धन्यवाद स्वरूप पवित्र मिस्सा बलिदान से हुआ, जिसमें समाज में शांति, भाईचारे एवं सांप्रदायिक सौहार्द की स्थापना हेतु विशेष प्रार्थनाएँ की गईं। इस अवसर पर देश एवं विश्व में मानवता, प्रेम और एकता की भावना को सुदृढ़ करने की कामना भी की गई। इस वर्ष के मुख्य अतिथि इलाहाबाद धर्मप्रांत के बिशप मोस्ट रेव. लुईस मस्कारिन्हास ने गुरुकुल दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए शिक्षा के महत्व, नैतिक मूल्यों तथा आध्यात्मिक जीवन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों को समाज सेवा, अनुशासन एवं आध्यात्मिकता के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
सायंकाल गुरुकुल के प्रेक्षागृह (मेडिटेशन हॉल) में छात्रों द्वारा विविध सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, जिन्होंने उपस्थित जनसमूह को अत्यंत प्रभावित किया। इस अवसर पर छात्रों ने संत जॉन द बैपटिस्ट के जीवन पर आधारित भावपूर्ण नाटक “द डांस ऑफ शैडोज़” (The Dance of Shadows) का प्रभावशाली मंचन कर उनके त्याग, विश्वास एवं समर्पण के संदेश को प्रस्तुत किया।
समारोह के दौरान गुरुकुलाचार्य फादर सन्तोष डी’सा ने गुरुकुल की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए वर्षभर की उपलब्धियों, शैक्षणिक गतिविधियों तथा आध्यात्मिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी। साथ ही अपने पुरोहिताभिषेक की स्वर्ण जयंती (गोल्डन जुबिली) मना रहे फादर सेबास्टियन पन्थलाडी का विशेष सम्मान एवं अभिनन्दन किया गया।
पूर्व महाधर्माचार्य आर्चबिशप डॉ. अल्बर्ट डिसूजा भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। उन्होंने गुरुकुल में अध्ययनरत सभी छात्रों को अपनी शुभकामनाएँ प्रदान कीं।
गुरुकुल के सहायक गुरुकुलाचार्य फादर विन्सेंट ने बताया कि वर्तमान में गुरुकुल में देश के विभिन्न राज्यों से कुल 19 छात्र पुरोहिताई की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक कैथोलिक पुरोहित बनने में लगभग 12 से 13 वर्षों का समय लगता है, जिसके दौरान छात्रों को हिन्दी एवं अंग्रेज़ी भाषा, इंटरमीडिएट एवं स्नातक स्तर की शिक्षा, भारतीय संस्कृति एवं तीज-त्योहारों, विभिन्न धर्म-संप्रदायों, शिक्षा शास्त्र तथा मनोविज्ञान का गहन अध्ययन कराया जाता है। प्रशिक्षण पूर्ण होने पर उम्मीदवारों का पावन पुरोहिताभिषेक किया जाता है, जिसमें उन्हें आजीवन ब्रह्मचर्य, आज्ञापालन एवं स्वैच्छिक निर्धनता का व्रत दिलाया जाता है।
इस अवसर पर क्रिश्चियन समाज सेवा सोसाइटी के अध्यक्ष श्री डेनिस सिल्वेरा ने गुरुकुल परिवार को हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए सभी छात्रों के उज्ज्वल भविष्य एवं सफल आध्यात्मिक जीवन की मंगलकामना की।