आगरालीक्स…आगरा की बेढ़ई या पेठा में क्या खास है, या मथुरा का पेड़ा इतना क्यों पसंद किया जाता है. “वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूज़ीन” से छह जिलों के पारंपरिक व्यंजनों के लिए मांगे गए सुझाव. विवि बना नॉलेज पार्टनर
उत्तर प्रदेश सरकार के एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग द्वारा राज्य की पारंपरिक पाक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से “वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूज़ीन (ODOC)” पहल प्रारंभ की जा रही है। इस महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा को नॉलेज पार्टनर के रूप में चयनित किया गया है। उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय, उत्तर प्रदेश (ODOP सेल, कानपुर) द्वारा विश्वविद्यालय को भेजे गए आधिकारिक पत्र के अनुसार, ODOC पहल ODOP कार्यक्रम का एक रणनीतिक विस्तार है, जिसका उद्देश्य जनपद-विशेष के पारंपरिक व्यंजनों एवं खाद्य उत्पादों को गुणवत्ता संवर्धन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाज़ार से जोड़ते हुए व्यावसायिक रूप देना है।
इस पहल के अंतर्गत विश्वविद्यालय को आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, मथुरा, एटा, कासगंज एवं हाथरस जनपदों के लिए नॉलेज पार्टनर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विश्वविद्यालय इन जनपदों में प्रचलित पारंपरिक व्यंजनों की पहचान, उनका वैज्ञानिक मूल्यांकन तथा उनके विकास हेतु अकादमिक एवं शोध आधारित सहयोग प्रदान करेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इस कार्य की जिम्मेदारी आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के निदेशक प्रो. संजय चौधरी को सौंपी गई है। इस अवसर पर प्रो. संजय चौधरी ने बताया कि ODOC पहल को अधिक प्रभावी एवं जनसहभागिता आधारित बनाने के उद्देश्य से आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, मथुरा, एटा, कासगंज एवं हाथरस जनपदों से पारंपरिक व्यंजनों/खाद्य उत्पादों से संबंधित सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि कोई भी व्यक्ति अपने जनपद के पारंपरिक व्यंजन या खाद्य उत्पाद से संबंधित सुझाव, उसका संक्षिप्त विवरण, विशेषता एवं संभावनाओं की जानकारी लिखित रूप में 31 जनवरी 2026 तक ई-मेल के माध्यम से भेज सकता है। सुझाव भेजते समय अपना नाम, शहर एवं संपर्क नंबर अवश्य अंकित करें। सुझाव निम्नलिखित ई-मेल आईडी पर भेजे जा सकते हैं —
iquacinternal@gmail.com
ODoC कार्यक्रम को राज्य में पर्यटन, स्थानीय उद्यमिता एवं आजीविका सृजन का सशक्त माध्यम माना जा रहा है। विश्वविद्यालय का यह अकादमिक सहयोग पारंपरिक व्यंजनों को नई पहचान देने के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों, उद्यमियों एवं युवाओं के लिए नए अवसर भी सृजित करेगा।