आगरालीक्स…दयालबाग में छाने लगी बसंती बहार. फूलों और लाइटों से सजने लगे घर द्वार…कल से शुरू हो रहा बसंतोत्सव
आगरा में बसंती बहार छाने लगी है. दयालबाग में घर—घर को सजाया जा रहा है. बसंत का पावन पर्व दयालबाग में खास तरह से मनाया जाता है. दयालबाग की कॉलोनियों में हर घर को फूलों व रंगोली से आकर्षक रूप से सजाया जा रहा है. ऋतुराज के स्वागत को हर कोई उत्सुक है. 20 जनवरी से 23 जनवरी तक दयालबाग में बसंतोत्सव की शुरुआत हो रही है. पहले दिन प्रेम नगर में खेतों पर बेबी शो का आयोजन किया गया. 21 जनवरी को प्रेम नगर गेट पर बसंत स्पोटर्स और 22 जनवरी को जिमनासिटक का आयोजन किया जा रहा है और 23 जनवरी को विद्युत सज्जा से दयालबाग के कोने कोने को सजाया जाएगा और उत्सव मनाया जाएगा.

दयालबाग में बसंतोत्सव अत्यधिक उल्लास एवं धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। एक ओर जहाँ प्रेम एवं भक्ति की अजस्र धारा प्रवाहित हो रही है, वहीं दूसरी ओर विविध कार्यक्रमों एवं प्रतियोगिताओं के माध्यम से दयालबाग निवासियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। इसी कड़ी में आज प्रातः सत्संग की कर्मभूमि खेतों पर बेबी शो का आयोजन किया गया।
गत वर्षों की भाँति इस वर्ष भी बेबी शो का आयोजन दो भागों में संपन्न हुआ। पहले भाग में आध्यात्मिक सौंदर्य, बुद्धिमत्ता एवं स्वास्थ्य परीक्षण से संबंधित प्रतियोगिताएँ दिनांक 21 दिसम्बर 2025 को पी.वी. प्राइमरी स्कूल के सुसज्जित प्रांगण में आयोजित की गईं। इस प्रतियोगिता में दयालबाग में स्थायी रूप से निवास करने वाले तीन सप्ताह से आठ वर्ष तक की आयु के 34 लड़कों एवं 39 लड़कियों सहित कुल 73 बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दूसरे भाग में फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता दिनांक 3 जनवरी 2026 को संपन्न हुई, जिसमें 14 बच्चों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ परम पूज्य हुज़ूर प्रो. प्रेम सरन सतसंगी साहब एवं ममतामयी रानी साहिबा की दिव्य उपस्थिति में प्रार्थना के साथ हुआ। तत्पश्चात फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में विजयी बच्चों की प्रस्तुति, नर्सरी स्कूल के नन्हे-मुन्नों द्वारा गाए गए पाठ तथा प्राइमरी स्कूल के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सुमधुर कव्वाली ने वातावरण को आनंद एवं उल्लास से भर दिया।

शहर में स्थित दयालबाग़, जो कि राधास्वामी सत्संग का मुख्यालय है, में बसंत का विशेष महत्व है। बसंत पंचमी का दिन राधास्वामी मत के सत्संगियों के लिए महा आनन्द व विलास का है क्योंकि इसी पवित्र दिवस, 15 फरवरी 1861 को, मत के प्रथम आचार्य परम पुरूष पूरन धनी हुज़ूर स्वामी जी महाराज ने जगत उद्धार का संदेश पहले-पहल प्रगटाया और सत्संग आम जारी फरमाया।
“घट में खेलूँ अब बसन्त।
भेद बताया सतगुरु संत।।“

बसंत पंचमी, 20 जनवरी 1915, के दिन राधास्वामी मत के पाँचवें आचार्य, सर साहबजी महाराज द्वारा राधास्वामी सत्संग का मुख्यालय, दयालबाग़, आगरा शहर में स्थापित करने हेतु एक शहतूत का पौधा लगा कर दयालबाग़ की नींव रखी गई। इसके साथ ही नई सत्संग संस्कृति की नींव भी रखी गई। दयालबाग़ में शिक्षा एवं संस्कृति की शुरुआत एक बहुत सुन्दर व कोमल पौधे के रूप में 1 जनवरी 1916 को मिडिल स्कूल, जिसे राधास्वामी एजुकेशनल इन्स्टीट्यूट आरईआई के नाम से जाना जाता है, के रूप में की गयी। यह पौधा धीरे-धीरे बढ़ते हुये वर्तमान में यूनिवर्सिटी डीईआई के रूप में एक बड़ा वृक्ष बन गया है, जिसका प्रभाव न केवल अपने देश के विभिन्न भागों में अपितु विदेशों में भी हो रहा है। दयालबाग़ एजुकेशनल इन्स्टीट्यूट डीईआई नाम के इस वृक्ष की सुगंध चहुँ दिस फैल रही है।
“आज आई बहार बसंत।
उमंग मन गुरु चरनन लिपटाय।।“
बसंत का दिन राधास्वामी मत के सत्संगियों के लिए बहुत महत्व रखता है। इसी दिन राधास्वामी संवत का नया वर्ष प्रारम्भ होता है। इस दिन को सभी सत्संगी अत्यधिक हर्षोल्लास से मनाते हैं तथा हुज़ूर राधास्वामी दयाल का गुणगान करते हैं। बसंत के आगमन के पूर्व दयालबाग में इसके स्वागत की तैयारियाँ प्रारम्भ हो जाती हैं। छोटे-छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुज़ुर्गों के उल्लास की सीमा नहीं होती है। अपने घरों तथा मोहल्लों और पूरे दयालबाग़ में सफाई व सजावट में सभी जुट जाते हैं। सभी लोगों के सामूहिक प्रयासों से बसंत के सुअवसर पर दयालबाग़ में एक अनोखी छटा देखने को मिलती है। बसंत के पर्व को सत्संगी अत्यन्त भक्तिभाव पूर्ण रीति से मनाते हैं और अपने परम पूज्य गुरू महाराज के चरनों में राधास्वामी दयाल का शुकराना अदा करते हुए, पूर्ण उमंग व प्रेम के साथ आरती, पूजा व अभ्यास में इस दिन को व्यतीत करते हैं और अपने भाग्य सराहते हैं।
“मोहि मिल गए रा-धा-स्व-आ-मी पूरे संत।
अब बजत हिये में धुन अनन्त।।“