आगरालीक्स…. #agrametro आगरा मेट्रो डिपो में होगी ‘ज़ीरो डिस्चार्ज फ़ैसिलिटी’; यहां वेस्ट वॉटर का ट्रीटमेंट कर फिर से किया जाएगा प्रयोग. पीएसी परिसर में बन रहा विश्वस्तरीय डिपो
विश्वस्तरीय डिपो का हो रहा निर्माण
ताज ईस्ट गेट से सिकंदरा के बीच बन रहे प्रथम कॉरिडोर के लिए पीएसी परिसर में विश्वस्तरीय डिपो का निर्माण किया जा रहा है। यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक श्री कुमार केशव की पर्यावरण एवं जल संरक्षण की नीतियों के तहत आगरा मेट्रो डिपो भी पूरी तरह से ‘जीरो डिस्चार्ज फैसिलिटी’ पर आधारित होगा। कानपुर व लखनऊ की तरह आगरा डिपो परिसर में भी वेस्ट वॉटर को निस्तारित या डिस्चार्ज नहीं किया जाएगा बल्कि इसे पूरी तरह से रीसाइकल करके विभिन्न कार्यों में इस्तेमाल किया जाएगा।
डिपो में लगेगा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट
बता दें कि पीएसी स्थित मेट्रो डिपो में ड्युअल प्लम्बिंग की व्यवस्था होगी, यानी यहां पर साफ़ पानी और रीसाइकल्ड पानी के लिए अलग-अलग पाइप लाइन बिछाई जाएंगी। इसके साथ ही डिपो परिसर में एक संयुक्त वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा, जिससे विभिन्न गतिविधियों के चलते निकलने वाले वेस्ट पानी को रीसाइकिल किया जा सकेगा। बता दें कि इस रीसाइकिल्ड पानी को ट्रेनों की सफाई के लिए प्रयोग किया जाएगा।
‘ग्रे वॉटर’ और ‘ब्लैक वॉटर’ के लिए लगेगा एक संयुक्त प्लांट
आगरा मेट्रो डिपो में एक लाख लीटर की क्षमता वाला एक संयुक्त ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। इस ट्रीटमेंट प्लांट में ग्रे वॉटर यानी किचन, वॉशरूम और फ़्लोर क्लीनिंग आदि से निकलने वाले पानी को रीसाइकल करने के लिए 70 हजार लीटर की क्षमता वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लान्ट (एसटीपी) व ऑटोमैटिक वॉश प्लान्ट में ट्रेनों की सफ़ाई और मेंटेनेंस शेड में ट्रेनों की मरम्मत आदि से निकलने वाले केमिकल युक्त वेस्ट वॉटर, जिसे तकनीकी भाषा में ‘ब्लैक वॉटर’ कहा जाता है, उसे रीसाइकल करने के लिए 30 हजार लीटर की क्षमता वाले एफ़्ल्यूएन्ट ट्रीटमेंट प्लान्ट (ईटीपी) को संयुक्त रूप से एक ही बिल्डिंग लगाया जाएगा। इससे न सिर्फ जगह की बचत होगी, बल्कि निर्माण की लागत में भी कमी आएगी।
डिपो परिसर में होंगे विभिन्न क्षमता वाले वॉटर टैंक
डिपो परिसर में विभिन्न क्षमता वाले भूमिगत टैंकों का निर्माण किया जाएगा, जिसमें रॉ टैंक, डोमेस्टिक टैंक व फायर टैंक होंगे। 1 लाख, 25 हजार लीटर की क्षमता वाले रॉ टैंक में डिपो परिसर में विभिन्न श्रोतों से प्राप्त होने वाले जल को एकत्र किया जाएगा। वहीं, 1 लाख लीटर की क्षमता वाले डोमेस्टिक टैंक में डोमेस्टिक गतिविधियों के लिए प्रयोग किए जाने वाले जल को स्टोर किया जाएगा। इसके साथ ही डिपो परिसर में आग लगने जैसी किसी अप्रीय घटना का सामना करने के लिए 2 लाख लीटर पानी की क्षमता वाला फायर टैंक बनाया जाएगा।
वर्षा जल संचयन के लिए बनेंगे ‘रेन वॉटर हारवेस्टिंग पिट्स’
डिपो परिसर में वर्षा जल के संचयन के लिए रेन वॉटर हारवेस्टिंग पिट्स बनाए जाएंगे। वर्षा ऋतु के दौरान डिपो परिसर की विभिन्न विभिन्न बिल्डिंग्स से वर्षा जल को ड्रेन पाइप के जरिए इन पिट्स में एकत्र किया जाएगा। इसके बाद बोरिंग के जरिए इस जल को वापस जमीन में भेज दिया जाएगा, जिससे भूगर्भ जल स्तर को सुधारने में काफी मदद मिलेगी।