आगरालीक्स…Agra News: आगरा -लखनऊ एक्सप्रेसवे पर रात 12 बजे से सुबह आठ बजे तक सबसे ज्यादा हादसे, नौ महीने में 94 लोगों की हुई मौत। जानें कारण ( Agra News: 94 death in 9 month on Agra-Lucknow Expressway, 70% accident between 12 PM to 8 AM#Agra )
आगरा से लखनऊ को जोड़ने वाला 302 किलोमीटर लंबा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, जो प्रदेश की आधुनिकता और तेज रफ्तार का प्रतीक है, अब रात के समय मौत का गलियारा बन चुका है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा अधिवक्ता के. सी. जैन को उपलब्ध कराए गए नवीनतम आधिकारिक आंकड़े हिला देने वाले हैं। यदि आप रात 12 बजे से सुबह 8 बजे के बीच इस एक्सप्रेसवे पर गाड़ी चला रहे हैं, तो आपको यह जानना चाहिए कि यह सफर सड़क नहीं, मौत की ओर जाता रास्ता हो सकता है।
हर 10 में से 7 मौतें रात 12 से सुबह 8 बजे के बीच
जनवरी 2025 से सितम्बर 2025 में कुल 1077 हादसे दर्ज हुए – जिनमें से 583 हादसे (54 प्रतिशत) रात में हुए, जबकि बाकी 494 हादसे (46 प्रतिशत) दिन में। लेकिन सबसे भयावह आँकड़ा यह है कि रात वाले हादसों में मृत्यु दर कहीं अधिक रही – लगभग दोगुनी। रात 12 बजे से प्रातः 08 बजे के बीच मौतों की संख्या 66 थी और शेष समय में 28 मौतें हुई।
ये दिए गए सुझाव
अधिवक्ता के. सी. जैन का कहना कि रात की गति सीमा घटाई जाएः रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक कारों के लिए गति सीमा 120 किमीध्घं से घटाकर 75 किमी/घंटा की जाए। यह परिवर्तन मोटर वाहन अधिनियम की धारा 112(2) के अंतर्गत उ0प्र0 शासन द्वारा अधिसूचना जारी कर किया जा सकता है।
ड्राइवरों के रुकने की सुरक्षित व निःशुल्क व्यवस्थाः वर्तमान में रुकने की सुविधा बहुत महंगी है (₹1600 – ₹2000)। सरकार को निःशुल्क डॉर्मेटरी व विश्राम स्थल उपलब्ध कराने होंगे, खासकर पेट्रोल पंपों, जन सुविधाओं और टोल प्लाजा के पास।
रात में सस्ती चाय व भोजन सुविधाः रात में ₹30-₹45 की चाय किसी ट्रक ड्राइवर के लिए विलासिता है। सरकार को सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से ₹5 में चाय और ₹20 में भोजन उपलब्ध कराना चाहिए।
डिजिटल बोर्ड व चेतावनी संकेतः हर टोल प्लाजा व जनसुविधा केन्द्र पर चमकते डिजिटल बोर्ड लगाए जाएँ, जिन पर लिखा हो: “रात की नींद, मौत की नींद न बने।”
नियमित हादसा डेटा सार्वजनिक किया जाएः यूपीडा हर महीने एक्सप्रेसवे हादसों की रिपोर्ट व जांच परिणाम वेबसाइट पर डाले, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।
रात के सफर में क्यों बढ़ती है मौतों की संभावना
- ड्राइवरों की नींद और झपकी – लंबे सफर में थकान से चालक नींद की गिरफ्त में आ जाते हैं।
- अत्यधिक रफ्तार – रात में ट्रैफिक कम होने के कारण लोग 140-150 किमी/घंटा तक गाड़ी दौड़ाते हैं।
- लेन अनुशासन की कमी – धीमे और तेज वाहन एक ही लेन में चलते हैं, जिससे टकराव का जोखिम बढ़ता है।
- सुविधाओं की अनुपलब्धता – रुकने, सोने या चाय पीने के लिए कोई सस्ती जगह नहीं।
- अंधेरा और दृश्यता की कमी – खराब रोशनी और हाई-बीम का दुरुपयोग भी हादसों को आम बनाता है।
- लंबा एकसार रास्ता, जिससे एकाग्रता कम होती है
- सड़क पर पर्याप्त चेतावनी संकेतों की कमी
जनवरी 2025 से सितम्बर 2025
कारण कुल मौतें रात 12 से 8 बजे के बीच मौतें प्रतिशत
नींद/झपकी 42 38 85.7 प्रतिशत
ओवरस्पीडिंग 21 13 61.9 प्रतिशत
अन्य कारण 27 15 55.5 प्रतिशत
कुल 94 मौतें 66 मौतें 70.21 प्रतिशत