Tuesday , 1 September 2026
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Agra News : A Brief Survey by the Center For Self and Career Development on Women’s Mental Health in Agra

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आगरालीक्स…हम रोते हैं तो ‘ज्यादा इमोशनल’ और अपने हक के लिए बोलें तो ‘एटीट्यूड’, पढें आगरा में किन—किन कसौटियों पर परखी जा रहीं महिलाएं ? महिला दिवस पर आंखें खोल देने वाला सर्वे महिलाओं की ही जुबानी

आगरा में सेंटर फॉर सेल्फ एंड कॅरियर डवपलमेंट यानि सीएससीडी। मेहविश यहां इंटर्न हैं। इस संस्थान के निदेशक डॉ. नवीन गुप्ता के निर्देशन में वे काम कर रही हैं। उन्हीं से प्रेरणा पाकर मेहविश ने आगरा में हर आयु और वर्ग की कुछ महिलाओं से बातचीत आधारित एक सर्वे किया और महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को पढ़ने की कोशिश की। पेश है यह रिपोर्ट मेहविश के ही शब्दों में, जो दर्शाती है कि काम-काज और परिवार के बीच संतुलन बनाने के दबाव, लैंगिक असमानता और भावनात्मक बोझ के कारण महिलाएं बर्नआउट (मानसिक थकान), तनाव, अवसाद और एंग्जायटी से पीड़ित हैं।

परिचय
मानसिक स्वास्थ्य समग्र कल्याण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, फिर भी महिलाएँ अक्सर ऐसे भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक दबावों का सामना करती हैं जो अनसुने या अनकहे रह जाते हैं। अपनी किशोरावस्था से लेकर वयस्कता तक, महिलाएँ विभिन्न सामाजिक, भावनात्मक, हार्मोनल और व्यक्तिगत चुनौतियों से गुजरती हैं जो उनके मानसिक स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित कर सकती हैं। महिलाओं से एक ही समय में बेटी, बहन, पत्नी, बहू, माँ और पेशेवर के रूप में कई जिम्मेदारियों को निभाने की अपेक्षा की जाती है। अपेक्षाओं, रिश्तों, काम के दबाव और सामाजिक निर्णयों के बीच निरंतर संतुलन बनाना भावनात्मक थकावट और तनाव पैदा कर सकता है।

किशोरावस्था में मानसिक समस्याएं
जब एक लड़‌की किशोरावस्था में प्रवेश करती है, तो उसके शरीर, भावनाओं और सोच में बहुत बदलाव आते हैं। इस समय कई लड़कियों निम्नलिखित स्थितियों का अनुभव करती हैं —

— अपने शरीर को लेकर असुरक्षित महसूस करना।
— दूसरों से अपनी तुलना करना।
— सोशल मीडिया के कारण खुद को कम समझना।
— पढ़ाई और करियर का दबाव महसूस करना।
— परिवार की रोक-टोक और समाज के डर से घुटन महसूस करना।
— अकेलापन, घबराहट और अत्यधिक सोचने का शिकार होना।

पसंद, पहनावे, सामाजिक जीवन और दोस्ती के लिए भी आंका जाता है
एक लड़की होने के नाते अक्सर ऐसा महसूस होता है कि लोग हमें समझाने के बजाय जज (परखते) अधिक करते हैं। यदि हम रोते हैं तो "ज़्यादा इमोशनल" कहा जाता है, और यदि अपने हक के लिए बोलें तो "एटीट्यूड" कहा जाता है। किशोर लड़कियों को अक्सर उनकी पसंद, पहनावे, सामाजिक जीवन और दोस्ती के लिए भी आंका जाता है। यदि वे खुद पर या अपने करियर पर ध्यान केंद्रित करती हैं, तो समाज कभी-कभी उन्हें स्वार्थी या लापरवाह करार देता है।

कामकाजी महिलाओं की मानसिक समस्याएँ
आज की कामकाजी महिलाएँ घर और ऑफिस दोनों संभालती हैं। कॉपर्पोरेट जीवन में महिलाओं को कई मानसिक दबावों से गुजरना पड़ता है:

— काम का दबाव और समय सीमा
— खुद को बार-बार साबित करने का दबाव
— लिंग भेद
— नौकरी की असुरक्षा
— शादी और करियर के बीच संतुलन
— कार्यस्थल पर उत्पीड़न या विषाक्त वातावरण
— "आदर्श महिला" बनने का सामाजिक दबाव
— कार्यस्थल पर बदमाशी, रूढ़िवादिता और उत्पीड़न
— लोगों का यह सोचना कि महिलाओं से संपर्क करना या उन्हें निशाना बनाना आसान है
— महिलाओं द्वारा किए गए छोटे प्रयासों के लिए सराहना की कमी

बाहर से मजबूत, भीतर से तनावग्रस्त
कई महिलाएं बाहर से मजबूत दिखती है, लेकिन अंदर से तनाव, चिंता, अवसाद और भावनात्मक थकावट महसूस करती हैं। कई बार वे इतनी थक जाती हैं कि खुद के लिए समय ही नहीं बचता। कई कामकाजी महिलाएं इसलिए भी मानसिक रूप से थक जाती हैं क्योंकि उनसे बिना किसी शिकायत के परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ ऑफिस का काम भी पूरी तरह से करने की अपेक्षा की जाती है।

गृहिणियों की मानसिक समस्याएं
लोग अक्सर सोचते हैं कि गृहिणियां केवल घर संभालती हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि उनकी जिम्मेदारियां कभी खत्म नहीं होतीं।

एक गृहिणीः
— पूरे परिवार का ध्यान रखती है।
— अपनी इच्छाओं को पीछे छोड़ देती है।
— आर्थिक रूप से निर्भर होने के कारण कई बार खुद को कमज़ोर महसूस करती है।
— सराहना न मिलने से अकेलापन महसूस करती है।
— लगातार काम करने के बावजूद "तुम करती ही क्या हो?" जैसे शब्द सुनती है।
— यह बातें धीरे-धीरे उनके आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।
— भावनात्मक समर्थन की कमी महसूस करती है।
— कई बार अपने दर्द और थकान को चुपचाप सहती रहती है।

एक गृहिणी बाहर से भावनात्मक रूप से मजबूत दिख सकती है, लेकिन आंतरिक रूप से वह अकेलापन, भावनात्मक उपेक्षा, निराशा और भावनात्मक जलन महसूस कर सकती है।

पीसीओडी/पीसीओएस
आजकल कई युवा लड़कियां पीसीओडी और पीसीओएस जैसी समस्याओं से प्रभावित हैं। इसके कारणः

— हार्मोनल असंतुलन होता है।
— मूड स्विंग्स (मिजाज में बदलाव) बढ़ जाते हैं।
— तनाव और चिंता बढ़ सकती है।
— बॉडी शेमिंग (शरीर की बनावट पर टिप्पणी) का सामना करना पड़ता है।
— आत्मविश्वास कम हो सकता है।
— शादी और गर्भावस्था को लेकर डर पैदा हो सकता है।
— कई लड़कियों गर्भधारण न कर पाने की चिंता से भावनात्मक रूप से परेशान हो जाती हैं।

निष्कर्ष
समाज को महिलाओं के प्रति अपना दृष्टिकोण बदलने की जरूरत है। हर महिला सम्मान, भावनात्मक समर्थन, प्रशंसा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और एक सुरक्षित वातावरण की हकदार है। मानसिक स्वास्थ्य शारीरिक स्वास्थ्य के समान ही महत्वपूर्ण है।

Written by
Agraleaks Team

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