आगरालीक्स….आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय और कलम एक स्वैच्छिक संस्था के बीच हस्तशिल्प क्षेत्र में पांच वर्ष का समझौता..विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को मिलेगा अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा और कानपुर की कलम एक स्वैच्छिक संस्था (एनजीओ) के बीच हस्तशिल्प, मूर्तिकला, रोजगार, इंटर्नशिप एवं रचनात्मक प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के लिए पांच वर्ष की अवधि का समझौता ज्ञापन किया गया। विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. आशु रानी की गरिमामयी उपस्थिति में विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव श्री अजय मिश्रा तथा कलम एक स्वैच्छिक संस्था की ओर से सचिव डॉ. विपिन शुक्ला ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
यह समझौता विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को व्यापक मंच उपलब्ध कराने और उन्हें हस्तशिल्प, कला, बाजार, रोजगार तथा व्यावसायिक अवसरों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। पांच वर्ष के इस सहयोग के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मक क्षमता को प्रदर्शित करने के साथ-साथ उसे रोजगारोन्मुख बनाने के अवसर प्राप्त होंगे।
समझौते के अंतर्गत आगामी 16 से 22 सितंबर 2026 तक आयोजित होने वाले गांधी शिल्प बाजार एवं हस्तशिल्प मेले में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की ओर से एक स्टॉल लगाया जाएगा। इस स्टॉल पर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा तैयार हस्तशिल्प, स्वनिर्मित उत्पाद, मूर्तियां एवं अन्य कलाकृतियां प्रदर्शित की जाएंगी। इस मेले की खास बात यह होगी कि देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले शिल्पकारों एवं कलाकारों के साथ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। इससे विद्यार्थियों को देश की विविध हस्तशिल्प परंपराओं को करीब से देखने, समझने और अपनी प्रतिभा को व्यापक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान संस्थान के पारिवारिक संसाधन प्रबंधन विभाग की ओर से डॉ. प्रीति यादव के समन्वय में विद्यार्थियों द्वारा तैयार हस्तशिल्प एवं स्वनिर्मित उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे। वहीं ललित कला संस्थान के मूर्तिकला विभाग की ओर से डॉ. गणेश कुशवाहा के समन्वय में विद्यार्थियों द्वारा निर्मित मूर्तियां एवं अन्य कलाकृतियां प्रदर्शनी का हिस्सा होंगी। विद्यार्थियों को अपनी कलाकृतियों के प्रदर्शन एवं बिक्री के माध्यम से अपनी रचनात्मक प्रतिभा को बाजार से जोड़ने का अवसर मिलेगा।
रेडियो पर बताया हस्तशिल्प को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने पर जोर
इसी क्रम में हस्तशिल्प विकास आयुक्त कार्यालय, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के आगरा स्थित हस्तशिल्प सेवा केंद्र के सहायक निदेशक श्री रंजीत कुमार ने विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो 90.4 एफएम ‘आगरा की आवाज’ पर विशेष बातचीत की। उन्होंने विद्यार्थियों एवं युवाओं के हित में मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं और हस्तशिल्प क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हस्तशिल्प और रचनात्मक कार्य केवल कला की अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्हें कौशल विकास, उत्पाद निर्माण, बाजार से जुड़ाव तथा रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों में बदला जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों और महिलाओं को अपनी रचनात्मक प्रतिभा को कौशल एवं बाजार की आवश्यकताओं से जोड़कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
परिवार के साथ आएं और बच्चों को भारतीय हस्तशिल्प से जोड़ें
मेले के दौरान प्रत्येक शाम 6 से 8 बजे तक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी। मेले में देश की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा, कला और संस्कृति की विविध झलक देखने को मिलेगी। ऐसे आयोजन बच्चों और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। भारत सरकार के टेक्सटाइल मंत्रालय के हस्तशिल्प विभाग द्वारा शहरवासियों से अपील है कि वे अपने परिवार के साथ गांधी शिल्प बाजार में आएं, देशभर के शिल्पकारों की कला देखें और बच्चों को भारत की समृद्ध हस्तशिल्प एवं पारंपरिक कला से परिचित कराएं। कलम संस्था द्वारा समझौते के तहत विद्यार्थियों को उनकी रुचि एवं पात्रता के अनुसार, उपलब्धता के आधार पर अधिकतम एक वर्ष की इंटर्नशिप के अवसर उपलब्ध कराने में भी सहयोग किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को अपने कौशल को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने और भविष्य के रोजगार के लिए तैयार होने का अवसर मिलेगा। इस अवसर पर माननीय कुलपति प्रो. आशु रानी, डॉ. विपिन शुक्ला, प्रो. संजय चौधरी, निदेशक, ललित कला संस्थान, प्रो. अचला गक्कर, निदेशक, गृह विज्ञान संस्थान, डॉ. प्रीति यादव तथा जनसंपर्क अधिकारी पूजा सक्सेना सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।