आगरालीक्स..आगरा की शारदा यूनिवर्सिटी में रोपे गए पौधे. पर्यावरण संरक्षण का दिया गया सशक्त संदेश
आगरा की शारदा यूनिवर्सिटी में रविवार को "वृक्षारोपण महायज्ञ -2026" का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर स्थित प्लांटेशन जोन में संपन्न हुआ. कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रो चांसलर वाईके गुप्ता, कुलपति प्रोफेसर डॉ. परमा नंद जिलाधिकारी मनीष बंसल (आईएएस), प्रमुख सचिव, व्यावसायिक शिक्षा डॉ. हरिओम (आईएएस), उद्योगपति पूरन डाबर, उपायुक्त उद्योग आगरा शैलेन्द्र, डीएफओ चंबल राजेश (आईएफएस) सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, डीन, निदेशक, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सहभागिता की।कुलपति प्रो. (डॉ.) परमा नंद ने कहा- "प्रकृति का संरक्षण केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की अनिवार्य आवश्यकता है। आज लगाया गया प्रत्येक पौधा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की नींव है। शारदा यूनिवर्सिटी आगरा शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरणीय जागरूकता को भी अपनी प्राथमिकता मानती है। हमें केवल वृक्ष लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके संरक्षण का भी संकल्प लेना चाहिए। "
प्रो चांसलर वाईके गुप्ता ने कहा-"हरित परिसर, स्वच्छ वातावरण और सतत विकास किसी भी उत्कृष्ट शिक्षण संस्थान की पहचान होते हैं। शारदा यूनिवर्सिटी आगरा समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का सदैव निर्वहन करती रही है। यदि प्रत्येक व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करे तो पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य शीघ्र प्राप्त किया जा सकता है।"
जिलाधिकारी मनीष बंसल (आईएएस) ने कहा-"पर्यावरण संरक्षण जनभागीदारी से ही संभव है। वृक्षारोपण केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनना चाहिए। युवाओं की सक्रिय भागीदारी निश्चित रूप से हरित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।" प्रमुख सचिव, व्यावसायिक शिक्षा डॉ. हरिओम (आईएएस) ने कहा- "शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक एवं पर्यावरणीय उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाते हैं तथा समाज के लिए सकारात्मक संदेश देते हैं।"उद्योगपति पूरन डाबर ने कहा- "वृक्षारोपण पर्यावरण संरक्षण की सबसे प्रभावी पहल है। पौधों का संरक्षण उतना ही आवश्यक है जितना उनका रोपण। प्रशासन एवं शिक्षण संस्थानों के संयुक्त प्रयासों से हरित एवं स्वच्छ समाज का निर्माण संभव है। " उपायुक्त उद्योग शैलेन्द्र ने कहा- "औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों का संतुलन आवश्यक है। आज के युवा यदि प्रकृति संरक्षण का संकल्प लें तो आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण प्राप्त होगा।"
डीएफओ चंबल राजेश (आईएफएस) ने कहा- "वृक्ष पृथ्वी के जीवनदाता हैं। जैव विविधता के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण एवं पौधों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।" सभी विशिष्ट अतिथियों ने विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। अंत में सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से वृक्षारोपण किया तथा हरित एवं स्वच्छ भारत के निर्माण का संकल्प लिया।